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उत्तर प्रदेश: भूमि विवाद में व्यापार मंडल ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और वैध अधिकारों की सुरक्षा की मांग
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने ग्राम मुखलिसपुर, तहसील धनघटा स्थित गाटा संख्या 580 एवं 581/1 से जुड़े भूमि विवाद के मामले में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने ग्राम मुखलिसपुर, तहसील धनघटा स्थित गाटा संख्या 580 एवं 581/1 से जुड़े भूमि विवाद के मामले में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने मामले में प्रार्थियों के वैध अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।व्यापार मंडल द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि विवादित भूमि संयुक्त संपत्ति एवं सहस्वामित्व से संबंधित है। संगठन का दावा है कि प्रार्थी दशरथ गुप्ता एवं गंगेश्वर संबंधित ऋण के न तो उधारकर्ता हैं और न ही गारंटर, इसके बावजूद उनके वैध हिस्से को प्रभावित करते हुए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि व्यापार मंडल का उद्देश्य किसी न्यायिक अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि प्रार्थियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा कर निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित कराना है। संगठन ने बैंक कर्मचारियों एवं तहसीलदार धनघटा की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की है। व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि प्रार्थियों के वैध हिस्से का विधिसम्मत निर्धारण एवं पृथक्करण किए बिना किसी भी प्रकार की बेदखली या कब्जा दिलाने की कार्रवाई न की जाए। साथ ही यदि नीलामी या कब्जा दिलाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की विधिक त्रुटि पाई जाती है तो उसका परीक्षण कर न्यायोचित निर्णय लिया जाए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और प्रशासन के प्रति आमजन का विश्वास बना रहे। संतकबीरनगर। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने ग्राम मुखलिसपुर, तहसील धनघटा स्थित गाटा संख्या 580 एवं 581/1 से जुड़े भूमि विवाद के मामले में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने मामले में प्रार्थियों के वैध अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। व्यापार मंडल द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि विवादित भूमि संयुक्त संपत्ति एवं सहस्वामित्व से संबंधित है। संगठन का दावा है कि प्रार्थी दशरथ गुप्ता एवं गंगेश्वर संबंधित ऋण के न तो उधारकर्ता हैं और न ही गारंटर, इसके बावजूद उनके वैध हिस्से को प्रभावित करते हुए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि व्यापार मंडल का उद्देश्य किसी न्यायिक अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि प्रार्थियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा कर निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित कराना है। संगठन ने बैंक कर्मचारियों एवं तहसीलदार धनघटा की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की है। व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि प्रार्थियों के वैध हिस्से का विधिसम्मत निर्धारण एवं पृथक्करण किए बिना किसी भी प्रकार की बेदखली या कब्जा दिलाने की कार्रवाई न की जाए। साथ ही यदि नीलामी या कब्जा दिलाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की विधिक त्रुटि पाई जाती है तो उसका परीक्षण कर न्यायोचित निर्णय लिया जाए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और प्रशासन के प्रति आमजन का विश्वास बना रहे। व्यापार मंडल ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करेगा, जिससे सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
व्यापार मंडल ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करेगा, जिससे सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
