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Laal Salaam movie review: ऐश्वर्या रजनीकांत की बड़े पर धमाकेदार वापसी 

Laal Salaam movie review: ऐश्वर्या रजनीकांत की बड़े पर धमाकेद

Laal Salaam movie review: ऐश्वर्या रजनीकांत की बड़े पर धमाकेदार वापसी  - Photo by : social media

नई दिल्ली  Published by: Rustom Imran , Date: 10/02/2024 11:00:05 am Share:
  • नई दिल्ली
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  • 10/02/2024 11:00:05 am
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संक्षेप

नई दिल्ली: रजनीकांत की फिल्म कई कारणों से 2024 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों में से एक थी। सबसे पहले, इसमें निर्देशक ऐश्वर्या रजनीकांत आठ साल बाद वापस एक्शन में नजर आ रही हैं, और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अपने पिता सुपरस्टार रजनीकांत को भी निर्देशित करती हैं। लाल सलाम, जिसमें विष्णु विशाल और विक्रांत भी हैं, एक ऐसी कहानी है जो क्रिकेट और धर्म के इर्द-गिर्द घूमती है और कैसे एक गाँव के लोग एक लोकप्रिय खेल का राजनीतिकरण करते हैं। 

विस्तार

 

नई दिल्ली: रजनीकांत की फिल्म कई कारणों से 2024 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों में से एक थी। सबसे पहले, इसमें निर्देशक ऐश्वर्या रजनीकांत आठ साल बाद वापस एक्शन में नजर आ रही हैं, और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अपने पिता सुपरस्टार रजनीकांत को भी निर्देशित करती हैं। लाल सलाम, जिसमें विष्णु विशाल और विक्रांत भी हैं, एक ऐसी कहानी है जो क्रिकेट और धर्म के इर्द-गिर्द घूमती है और कैसे एक गाँव के लोग एक लोकप्रिय खेल का राजनीतिकरण करते हैं।

थिरु (विष्णु विशाल) और मोइदीन भाई (रजनीकांत) के बेटे शम्सुद्दीन (विक्रांत) बचपन से ही एक दूसरे का विरोधी रहे हैं और यह बात उनके गांव में क्रिकेट के मैदान तक भी सभी को मालूम हुई है। मोइदीन भाई द्वारा शुरू की गई थ्री स्टार टीम, थिरु और शम्सू दोनों के साथ एक विजेता टीम थी, लेकिन थिरु की सफलता से ईर्ष्या करने वाले और गलत इरादों वाले लोगों ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया। थिरु प्रतिद्वंद्वी एमसीसी टीम बनाता है और दोनों टीमें गांव में विभिन्न धर्मों (हिंदू और मुस्लिम) का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस प्रकार, गांव में मैच को भारत बनाम पाकिस्तान कहा जाने लगा, जो पहले शांतिपूर्ण सद्भाव में रह रहा था।


अब मोइदीन भाई अपने फैमिली के साथ मुंबई में रहते हैं और एक शानदार क्रिकेट खिलाड़ी शम्सू को एक दिन भारत के लिए खेलते देखना उनका सपना है। परन्तु गाँव में एक मैच थिरु और शम्सू के जिंदगी में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन जाता है और सब कुछ बदल देता है। दो आदमियों का क्या होता है? क्या शम्सू अंत में भारत के लिए खेलता है? क्या मोइदीन भाई लड़कों की प्रतिद्वंद्विता और गाँव के हिंदू-मुस्लिम झगड़े को समाप्त कर देते हैं?

लाल सलाम का पहला पार्ट गांव, उसके लोगों और वहां के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संबंधों के इर्द-गिर्द घूमता है। यह थिरु और शम्सू के बीच कॉम्पीटीशन भी स्थापित करता है। दूसरे भाग में वास्तव में गति बढ़ती है और हम देखते हैं कि रजनीकांत अपना पावर-पैक प्रदर्शन करते हैं।

रजनीकांत को स्क्रीन पर एक मुस्लिम नेता मोइदीन भाई का रोल निभाते हुए देखना दिलचस्प है। उनके द्वारा दिए गए कुछ डायलॉग उनकी व्यक्तिगत मान्यताओं को स्पष्ट रूप से पेश करते हैं और आज के समय में काफी सार्थक हैं। वास्तव में वे रोंगटे खड़े कर देने वाले पल हैं।

उदाहरण के लिए, एक दृश्य में मोइदीन भाई कहते हैं, “भारत भारतीयों के लिए है और मैं एक भारतीय मुसलमान हूं। मैं यहीं जन्म लिया हुं और यहीं मरूंगा। यह मेरा घर है। हम सब को जाति या धर्म की नहीं किन्तु मानवता की बात करनी चाहिए और इंसानियत ही सबसे ऊपर है। जय हिन्द।" सबसे ऊपर मानवता एक ऐसा स्वरूप है जिसके बारे में सुपरस्टार ने हक़ीक़ी जीवन में भी बात की है।

इसके अलावा, रजनीकांत ने एक बाप की डबल रोले को बहुत ही निराले अंदाज़ से निभाया है, जिसकी अपने बेटे के लिए उम्मीदें हैं, और एक सामुदायिक नेता, जो मानता है कि धर्म या जाति के बावजूद सभी लोग एक हैं। वह अपने कार्यों में नपे-तुले हैं और यहां तक कि लड़ाई के दृश्य भी अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं हैं। रजनीकांत लाल सलाम की रीढ़ हैं। 

विष्णु विशाल और विक्रांत ने अपनी भूमिकाएं अच्छी तरह से निभाई हैं और क्रिकेटर के रूप में वे बहुत स्वाभाविक हैं क्योंकि वे वास्तविक जीवन में भी क्रिकेट खेलते हैं। उनकी भूमिकाओं का भी एक ग्राफ है और उन्होंने प्रदर्शन किया है। एआर रहमान का संगीत फिल्म के लिए एक मूल्यवर्धक है, जो दो अलग-अलग धर्मों को प्रदर्शित करने के लिए स्थानीय तत्वों और सूफी तत्वों दोनों को जोड़ता है।

निर्देशक ऐश्वर्या रजनीकांत ने एक ऐसी फिल्म बनाई है जो आज के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में प्रासंगिक है। वह सिनेमा जगत में धमाकेदार वापसी कर चुकी हैं और इस फिल्म की चर्चा जरूर होगी। कहानी विष्णु रंगासामी द्वारा बेहतर ढंग से लिखी जा सकती थी - कुछ कथानक बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझाया नहीं गया है और कुछ दृश्यों को संपादित किया जा सकता था क्योंकि वे फिल्म के मूड को ख़राब करते हैं।


ऐश्वर्या रजनीकांत की लाल सलाम एक संदेश देने वाला सामाजिक नाटक है। और दर्शक मोइदीन भाई के रूप में रजनीकांत को पसंद करेंगे और उम्मीद है कि वे स्क्रीन पर जो भी कहते हैं उसे घर वापस ले जाएंगे और दिल से लगाएंगे। मानवता सबसे ऊपर हैं। 

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