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The Concerns of European Theologians: 95 वर्षीय धार्मिक नेता ली मान-ही की हिरासत पर यूरोपीय धर्मविदों की चिंता, दक्षिण कोरिया से तत्काल रिहाई की मांग

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नई दिल्ली  Published by: Namita Chauhan , नई दिल्ली  Edited By: Namita Chauhan, Date: 15/07/2026 05:29:37 pm Share:
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संक्षेप

यूरोप के कई धर्मविदों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने दक्षिण कोरिया की सरकार से शिनचोनजी चर्च के 95 वर्षीय चेयरमैन ली मान-ही को तत्काल रिहा करने की मांग की है। यह मांग इटली की राजधानी रोम में आयोजित यूरोपियन अकादमी ऑफ रिलिजन (EuARe) के नौवें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रमुखता से उठाई गई, जहां वक्ताओं ने उनकी हिरासत को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के विपरीत बताया।

विस्तार

नई दिल्ली/रोम | 15 जुलाई 2026

यूरोप के कई धर्मविदों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने दक्षिण कोरिया की सरकार से शिनचोनजी चर्च के 95 वर्षीय चेयरमैन ली मान-ही को तत्काल रिहा करने की मांग की है। यह मांग इटली की राजधानी रोम में आयोजित यूरोपियन अकादमी ऑफ रिलिजन (EuARe) के नौवें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रमुखता से उठाई गई, जहां वक्ताओं ने उनकी हिरासत को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के विपरीत बताया।

सम्मेलन में धार्मिक विद्वानों ने चेयरमैन ली की रिहाई के समर्थन में अपील पर हस्ताक्षर भी किए और इसे केवल एक कानूनी मामला नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का विषय बताया।

 

चेयरमैन ली पर क्या हैं आरोप?

चेयरमैन ली मान-ही को 24 जून को राजनीतिक दल अधिनियम के कथित उल्लंघन सहित अन्य आरोपों में हिरासत में लिया गया था तथा 30 जून को उनके विरुद्ध अभियोग दायर किया गया।

संयुक्त पुलिस–अभियोजन जांच मुख्यालय के अनुसार, जुलाई 2021 से जनवरी 2024 के बीच उन्होंने चर्च के लगभग 50,000 सदस्यों को एक विशेष राजनीतिक दल में सामूहिक रूप से पंजीकृत कराने का निर्देश दिया था।

हालांकि, शिनचोनजी चर्च ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चर्च के सदस्यों ने अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्र इच्छा से राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया था। चर्च का कहना है कि चेयरमैन ली तथा चर्च ने तलाशी एवं जब्ती सहित पूरी जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग किया है।

चर्च ने यह भी कहा कि 95 वर्षीय वृद्ध धार्मिक नेता को हिरासत में रखना उनके लिए शारीरिक दंड के समान है और यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

रोम सम्मेलन में उठा मामला

3 जुलाई को इटली के रोम में आयोजित यूरोपियन अकादमी ऑफ रिलिजन (EuARe) के नौवें वार्षिक सम्मेलन में "वैश्विक संदर्भ में कोरिया का नया धर्म: शिनचोनजी" विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।

इस सत्र में यूरोप के विभिन्न देशों के धर्म अध्ययन से जुड़े विद्वानों ने शिनचोनजी चर्च पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए तथा दक्षिण कोरिया में चर्च से संबंधित हालिया घटनाक्रम, विशेषकर चेयरमैन ली की हिरासत, पर चर्चा की।

 

डॉ. मास्सिमो इंट्रोविन्ये का बयान

सम्मेलन में धर्म समाजशास्त्री तथा सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑन न्यू रिलिजन्स (CESNUR) के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मास्सिमो इंट्रोविन्ये ने कहा कि यूरोपीय संघ के देशों में 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही जेल भेजा जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो ऐसे मामलों में हाउस अरेस्ट का विकल्प अपनाया जाता है और वह भी केवल हिंसक अपराधों या ऐसे मामलों में जहां वास्तविक हिंसा का गंभीर जोखिम हो।

डॉ. इंट्रोविन्ये के अनुसार, चेयरमैन ली के मामले में ऐसा कोई हिंसक अपराध नहीं है तथा आरोप केवल चुनावी कानून के कथित उल्लंघन से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया द्वारा इस वृद्ध धार्मिक नेता के साथ किया जा रहा व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के 'मंडेला नियमों' की भावना के विपरीत है।

उनके अनुसार, विचाराधीन हिरासत सामान्य नियम नहीं होनी चाहिए और वृद्ध कैदियों पर इसे केवल अत्यंत सीमित परिस्थितियों में लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम एक गंभीर अन्याय है जिसके पीछे राजनीतिक तथा धार्मिक प्रतिशोध दिखाई देता है।

 

EIFRF अध्यक्ष एरिक रू की अपील

सम्मेलन में शामिल यूरोपीय अंतरधार्मिक मंच (EIFRF) के अध्यक्ष एरिक रू ने भी चेयरमैन ली की हिरासत पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि 95 वर्ष के व्यक्ति को जेल में रखना मानव गरिमा के सम्मान के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तब भी इतनी अधिक आयु के व्यक्ति को इस प्रकार हिरासत में रखना उचित नहीं कहा जा सकता।

एरिक रू ने दक्षिण कोरिया की सरकार से मामले की शीघ्र समीक्षा करने तथा चेयरमैन ली को तुरंत रिहा करने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इससे दक्षिण कोरिया की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

 

मानवाधिकार विशेषज्ञ अलेस्सांद्रो अमिकारेली की प्रतिक्रिया

मानवाधिकार अधिवक्ता अलेस्सांद्रो अमिकारेली, जो इंग्लैंड एवं वेल्स के वरिष्ठ न्यायालयों के सॉलिसिटर, इटली के बैरिस्टर तथा यूरोपियन फेडरेशन फॉर फ्रीडम ऑफ बिलीफ़ (FOB) के अध्यक्ष हैं, ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा दक्षिण कोरिया को ऐसा लोकतांत्रिक देश माना है जहां मानवाधिकारों को लोकतंत्र की बुनियाद के रूप में देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम चौंकाने वाला है तथा यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि किसी लोकतांत्रिक देश में 95 वर्षीय धार्मिक नेता को इस प्रकार के दबाव का सामना करना पड़े।

अमिकारेली ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दक्षिण कोरिया अपने ही संविधान और मानवाधिकार संबंधी मूल सिद्धांतों से दूर जा रहा है।

उन्होंने शिनचोनजी चर्च के समर्थन की घोषणा करते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष में उनका संगठन चर्च के साथ खड़ा है।

 

चर्च ने कहा—अब यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार का मुद्दा

शिनचोनजी चर्च ने कहा कि चेयरमैन ली की हिरासत का मामला अब केवल शैक्षणिक बहस तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मुद्दा बन चुका है।

चर्च के अनुसार, दुनिया भर के विद्वानों, मानवाधिकार संगठनों और धार्मिक नेताओं द्वारा लगातार समर्थन और याचिकाएं भेजी जा रही हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भी उठा मामला

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों United for Human Rights तथा CAP-LC (Coordination des Associations et des Particuliers pour la Liberté de Conscience) ने 25 मई को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में शिनचोनजी चर्च से जुड़े मानवाधिकार मुद्दों पर संयुक्त लिखित बयान प्रस्तुत किया।

 

यह दस्तावेज़ A/HRC/62/NGO/236 के रूप में 10 जून को प्रसारित किया गया।

बयान में कहा गया कि दक्षिण कोरिया में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है तथा किसी राजनीतिक दल में सदस्यों के पंजीकरण को धर्म–राजनीति मिलीभगत का प्रमाण मानना अंतरराष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर वाचा (ICCPR) के अनुरूप नहीं है क्योंकि यह प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार प्रदान करती है।

संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में विशेष रूप से शिनचोनजी को निशाना बनाने के लिए संयुक्त पुलिस–अभियोजक कार्यबल गठित किया गया था तथा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चर्च को सार्वजनिक रूप से "आपराधिक संगठन" बताया गया, जो निर्दोष माने जाने के सिद्धांत के विपरीत है।

उन्होंने दक्षिण कोरिया की सरकार से धर्म की स्वतंत्रता, भेदभाव-रहित व्यवहार तथा राज्य की तटस्थता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आग्रह किया।

 

चर्च की अंतिम प्रतिक्रिया

शिनचोनजी चर्च ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रमुख व्यक्तियों द्वारा चेयरमैन ली मान-ही के समर्थन में लगातार आवाज उठाए जाने से दक्षिण कोरियाई सरकार और न्यायपालिका पर दबाव बढ़ रहा है।

 

चर्च ने कहा कि चेयरमैन ली की शीघ्र रिहाई धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा का विषय है, जो किसी भी लोकतंत्र के मूलभूत मूल्य हैं।

 

स्रोत: SCJ TV Global प्रेस विज्ञप्ति (10 जुलाई 2026)

संपर्क: press@scjtvglobal.com

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