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राजस्थान: दलित परिवार पर हुआ जानलेवा हमला, जांच दल ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
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संक्षेप
राजस्थान: अलवर दलित अधिकार केन्द्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम के नेतृत्व में गठित चार सदस्यीय जांच दल ने वैशाली नगर थाना क्षेत्र में एक दलित परिवार के घर में घुसकर नाबालिग बच्ची और उसकी मां पर हुए बर्बर जानलेवा हमले के मामले की मौके पर जाकर पड़ताल की।
विस्तार
राजस्थान: अलवर दलित अधिकार केन्द्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम के नेतृत्व में गठित चार सदस्यीय जांच दल ने वैशाली नगर थाना क्षेत्र में एक दलित परिवार के घर में घुसकर नाबालिग बच्ची और उसकी मां पर हुए बर्बर जानलेवा हमले के मामले की मौके पर जाकर पड़ताल की। जांच दल ने पीड़ितों और चश्मदीद गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज कर महत्वपूर्ण साक्ष्यों का संकलन किया है। जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार, दिनांक 14.05.2026 को सुबह करीब 10:00 बजे पीड़िता मंजू अपने बेटे का लूटे गए मोबाइल फोन को वापस लेने आरोपी सीमा के पास गई थी, जिसे आरोपी ने तीन दिन पूर्व जबरन छीनकर 1500 रुपए की अवैध मांग की थी। वहां आरोपी सीमा ने पीड़िता पर अपना पालतू कुत्ता छोड़ दिया, जिसने स्वयं आरोपी को ही काट लिया और मोबाइल देने से मना कर दिया। इसी रंजिश में उसी दिन दोपहर करीब 12:00 बजे, जब पीड़िता मंजू और उसकी नाबालिग बेटी घर के कमरे में लेटी हुई थीं, तब आरोपी सीमा, सतपाल, राजू पंजाबी और उनके चार अन्य साथी धारदार व जानलेवा हथियारों (चाकू, गुरमाला, हॉकी, डंडे आदि) से लैस होकर अचानक घर में घुस आए और मां-बेटी पर बेरहमी से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में नाबालिग बच्ची और उसकी मां के दोनों हाथ, चेहरा, गला, गर्दन और पीठ गंभीर रूप से कट गए और वे लहूलुहान हो गईं। आरोपियों ने दोनों के कपड़े फाड़कर अश्लील हरकतें कीं और उन्हें अपमानजनक अश्लील एवं जातिसूचक गालियां दीं, जिसके बाद दोनों को गंभीर हालत में सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच दल के समक्ष यह तथ्य भी आया कि घटना के तुरंत बाद लिखित शिकायत देने के बावजूद थाना वैशाली नगर (अलवर) पुलिस ने अपराधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से अत्यधिक विलंब से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की और अनुसंधान में जानबूझकर घोर लापरवाही बरती जा रही है। आज दिनांक तक भी जांच अधिकारी ने घटनास्थल का मौका मुआयना नहीं किया है और न ही घर में बिखरे खून के धब्बे, घटना में प्रयुक्त हथियार या लूटा गया मोबाइल बरामद किया है। पुलिस द्वारा अब तक पीड़ितों के कोर्ट में बयान न करवाना, आरोपियों को गिरफ्तार न करना, मोबाइल की लोकेशन व सीडीआर न निकालना और मामले में पोक्सो (POCSO) एक्ट की धाराएं सम्मिलित न करना पुलिस प्रशासन की अपराधियों को संरक्षण देने की मंशा को साफ उजागर करता है। दलित अधिकार केन्द्र के जांच दल ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने, घटना में प्रयुक्त हथियारों व डिजिटल साक्ष्यों की जप्ती करने, मुकदमे में पोक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ने, पीड़ितों के अविलंब बयान दर्ज कराने, आरोपियों द्वारा दर्ज करवाए गए झूठे क्रॉस केस की निष्पक्ष जांच करने, पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा देने, नियमानुसार आर्थिक मुआवजा दिलवाने और 60 दिवस में संपूर्ण जांच पूरी करने की सख्त मांग की है। इस उच्च स्तरीय जांच दल में जिला समन्वयक शैलेष गौतम के साथ एडवोकेट प्रकाश चन्द सागर, निरमा बौद्ध और डॉ. रामचरण मेहरा प्रमुख रूप से सम्मिलित रहे। जांच दल जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट पूर्ण कर उच्च अधिकारियों एवं संबंधित आयोगों को प्रेषित कर उच्च स्तरीय कार्यवाही की मांग करेगा।
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