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उत्तर प्रदेश: चकबंदी विवाद को लेकर किसान यूनियन का 13 माह से धरना जारी, समाधान की मांग हुई तेज़
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: मिरजापुर भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के पदाधिकारियों ने भैंसवार गांव, जनपद सोनभद्र में चल रहे चकबंदी विवाद को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: मिरजापुर भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के पदाधिकारियों ने भैंसवार गांव, जनपद सोनभद्र में चल रहे चकबंदी विवाद को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। संगठन का कहना है कि पिछले 13 महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति जनपद मिरजापुर के उपाध्यक्ष धर्म देव द्वारा जिलाधिकारी महोदय को अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि भैंसवार गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसानों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया है। किसान यूनियन का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे ग्रामीण किसानों को अपने ही खेतों के अधिकार और सीमाओं को लेकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत दर्ज कराने और ज्ञापन सौंपने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि बीते 13 महीनों से किसान लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भैंसवार गांव में चल रहे चकबंदी विवाद की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसानों के हित में शीघ्र निर्णय लिया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाए। इस अवसर पर उपाध्यक्ष धर्म देव ने कहा कि किसान अपनी जमीन और अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन बड़े आंदोलन की रणनीति बनाने पर मजबूर होगा। किसान यूनियन के इस मामले के बाद एक बार फिर चकबंदी प्रक्रिया और ग्रामीण विवादों के समाधान को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
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