Contact for Advertisement 9650503773


दिल्ली: अस्पताल खरीद घोटाले की जांच हुई तेज, एसीबी ने दो और पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

- Photo by : NCR Samachar

दिल्ली  Published by: Shubhi Shikha Nayal , दिल्ली  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 02/07/2026 01:43:52 pm Share:
  • दिल्ली
  • Published by.: Shubhi Shikha Nayal ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 02/07/2026 01:43:52 pm
Share:

संक्षेप

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने जांच तेज कर दी है। मामले में अब तक दो और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

विस्तार

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने जांच तेज कर दी है। मामले में अब तक दो और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को 7 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी का कहना है की इस मामले में निजी कंपनियों और सप्लायरों  की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

अब तक तीन पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

एसीबी द्वारा अब तक इस मामले में कुल तीन पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इनमें पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज DGHS डॉ. वत्सला अग्रवाल, सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी CPA के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और CPA के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा शामिल हैं। यह कार्रवाई एफआईआर नंबर 07/2026 के तहत की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

700 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया जांच के घेरे में

एसीबी के अनुसार दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए लगभग 650 से 700 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया की जांच की जा रही है। आरोप है कि खरीद संबंधी नियमों और टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कई सामानों की खरीद बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई हो सकती है। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष अभी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

किन उपकरणों और सामग्रियों की हो रही जांच

बताया जा रहा हैं की अस्पतालों में उपयोग होने वाली कई महत्वपूर्ण वस्तुएं शामिल हैं। इनमें दवाइयां, सर्जिकल उपकरण, बेड लिनेन, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, सी-आर्म रेडियोलॉजी मशीन समेत अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद शामिल है। आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस प्रकार तैयार की गईं कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाए और कुछ विशेष कंपनियों को ही ठेके प्राप्त हो सकें।

टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी के आरोप

जानकारी के मुताबिक खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ अधिकारियों और सप्लायर कंपनियों के बीच मिलीभगत हुई। आरोप यह भी है कि तकनीकी शर्तों को जानबूझकर इस प्रकार बदला गया ताकि केवल चुनिंदा कंपनियां ही पात्र साबित हों। इससे सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

खेल के मास्टरमाइंड और शेल कंपनियों की भी जांच

बताया जा रहा हैं की ACB एक कथित बिचौलिए की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिस पर अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच संपर्क स्थापित कराने का आरोप है। इसके अलावा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से कई कंपनियों का रिकॉर्ड भी मंगाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि खरीद प्रक्रिया में शामिल कोई कंपनी शेल कंपनी तो नहीं थी। जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन और कंपनी संरचना की भी गहन जांच कर रही है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे नए सबूत और दस्तावेज सामने आएंगे, मामले में अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी निजी कंपनी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। एजेंसी का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताओं के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। इस मामले ने दिल्ली के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उपकरणों और दवाइयों की खरीद में कथित गड़बड़ियों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। अब सभी की नजर एसीबी की आगामी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।