Contact for Advertisement 9650503773


बिहार: वारिसलीगंज में 25 दिनों से बिस्कोमान में यूरिया खत्म, किसान काला बाजार से डेढ़ गुनी कीमत पर खरीदने को मजबूर

- Photo by : social media

अवय कुमार रंजन.बिहार  Published by: , Date: 05/02/2026 03:48:27 pm Share:
  • अवय कुमार रंजन.बिहार
  • Published by: ,
  • Date:
  • 05/02/2026 03:48:27 pm
Share:

संक्षेप

बिहार: खेती किसानी को जीविका का मुख्य साधन बना रखे वारिसलीगंज प्रखंड क्षेत्र के किसान अपनी गेहूं फसल की दूसरी सिंचाई करने में जुटे हुए हैं।ऐसे में किसानों को यूरिया की आवश्यकता है।

विस्तार

बिहार: खेती किसानी को जीविका का मुख्य साधन बना रखे वारिसलीगंज प्रखंड क्षेत्र के किसान अपनी गेहूं फसल की दूसरी सिंचाई करने में जुटे हुए हैं।ऐसे में किसानों को यूरिया की आवश्यकता है। पिछले 25 दिनों से वारिसलीगंज बिस्कोमान में यूरिया नहीं है।बाजार में जो यूरिया मिल रही है वह निर्धारित कीमत से करीब डेढ़ गुना अधिक है।क्षेत्र के किसान अपनी जरूरत के अनुसार,महंगी कीमत भुगतान कर बाजार की दुकानों से यूरिया खरीद रहे हैं।बिस्कोमान में यूरिया नहीं मिलने से पर किसानों की परेशानी बढ़ जाती है। बाजार के अनुज्ञप्तिधारी उर्वरक विक्रेता कहते हैं कि सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से अधिक कीमत रैक पर ही पड़ती है।बाद में दुलाई आदि का खर्च बढ़ जाता है। सरकार बजट में किसानों के लिए बहुत कुछ नहीं की है। अलबत्ता सल्फर कोटेड यूरिया का बैग 40 किग्रा, का बना दिया है। जबकि, वजन पांच किलोग्राम कम होगी और कीमत पहले से मात्र 12 रुपये कम होगी। किसानों ने आक्रोश प्रगट करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ किसानों का हितैषी बनने का नाटक करती है।जबकि किसानों को जरूरत के समय विभिन्न प्रकार के उर्वरकों की मनमानी कीमत दुकानदार वसूलते हैं। 

उर्वरक की कीमत नियंत्रण के लिए जबावदेह अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। लाचार किसानों को महंगी कीमत पर उर्वरक खरीदना पड़ता है।किसान बताते हैं कि खुले बाजार में यूरिया उपलब्ध है। लेकिन,सरकारी मूल्य से डेढ़ गुना अधिक कीमत पर किसानों को उपलब्ध कराई जाती है। बता दें कि बाजार में 266 रुपये प्रति बैग वाला यूरिया किसानों को 400 रुपये प्रति बैग मिल रही है।प्रखंड के किसान ओम प्रकाश, अशोक कुमार,महेश सिंह,बिपिन सिंह, सुरेंद्र सिंह, दुखन महतो,पवन सिंह, कारू सिंह कहते हैं कि वारिसलीगंज बिस्कोमान को जो यूरिया या डीएपी आवंटित होती है वह किसानों की संख्या के अनुसार काफी कम होता है। फलस्वरूप दो से तीन दिन के भीतर यूरिया का स्टाक समाप्ति का बोर्ड लटका दिया जाता है। अभी रबी सीजन में गेहूं की खेती के लिए किसानों को यूरिया की बहुत जरूरत है। इस बारे में विभाग को सोचना चाहिए। विस्कोमान में यूरिया की खेप शीघ्र पहुंचनी चाहिए। कहते हैं अधिकारी: करीब डेढ़ महीना पहले का इफको यूरिया का 800 बैग बिस्कोमान को उपलब्ध कराया गया था,जिसे किसानों के बीच वितरित कर दिया गया है। पिछले 25 दिनों से बिस्कोमान में यूरिया नहीं है। यूरिया कब तक उपलब्ध होगी फिलहाल इसकी सूचना नहीं है।