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मध्य प्रदेश: ऋण न चुकाने, एनपीए और कानूनी संरक्षण

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मध्य प्रदेश  Published by: Kamal Patni , Date: 10/02/2026 03:37:40 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: आज के समय में बहुत से लोग व्यवसाय, घर, शिक्षा या व्यक्तिगत जरूरतों के लिए बैंक या वित्तीय संस्थानों से ऋण (रुशड्डठ्ठ) लेते हैं। कई बार आर्थिक कठिनाइयों, व्यवसाय में घाटा, बीमारी, प्राकृतिक आपदा या

विस्तार

मध्य प्रदेश: आज के समय में बहुत से लोग व्यवसाय, घर, शिक्षा या व्यक्तिगत जरूरतों के लिए बैंक या वित्तीय संस्थानों से ऋण (रुशड्डठ्ठ) लेते हैं। कई बार आर्थिक कठिनाइयों, व्यवसाय में घाटा, बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से ऋण की किस्तें समय पर नहीं चुकाई जापा और खाता एनपीए (हृशठ्ठ-क्कद्गह्म्द्घशह्म्द्वद्बठ्ठद्द ्रह्यह्यद्गह्ल ) घोषित हो जाता है। ऐसी स्थिति में बैंक स््रक्रस्न्रश्वस्ढ्ढ कानून के तहत वसूली की कार्रवाई करता है। यह लेख आम नागरिक को सरल भाषा में यह समझाने के लिए है कि कानून क्या कहता है, उधारकर्ता को क्या अधिकार और संरक्षण प्राप्त है, रिकवरी एजेंट की अवैध कार्रवाई से कैसे बचाव करें, और ऋण विवाद का समाधान कैसे किया जा सकता है। 1 एनपीए (हृक्क्र) क्या होता है? जब किसी ऋ ण की किस्तें लगातार 90 दिनों तक नहीं चुकाई जातीं, तो बैंक उस खाते को एनपीए घोषित कर देता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उधारकर्ता अपराधी है, बल्कि यह एक वित्तीय स्थिति है जिसे कानून के अनुसार हल किया जाना चाहिए।

स््रक्रस्न्रश्वस्ढ्ढ कानून क्या है? स््रक्रस्न्रश्वस्ढ्ढ ्रष्ह्ल, 2002 (सरफेसी अधिनियम) के तहत बैंक या वित्तीय संस्था बिना अदालत की अनुमति के भी गिरवी रखी संपत्ति पर कब्जा लेकर उसे बेच सकती है, लेकिन यह अधिकार निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अधीन होता है। स््रक्रस्न्रश्वस्ढ्ढ की मुख्य प्रक्रिया 1. बैंक पहले धारा 13(2) के तहत नोटिस देता है जिसमें 60 दिन में बकाया चुकाने को कहा जाता है। 2. यदि भुगतान या संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तो बैंक धारा 13 (4) के तहत  संपत्ति पर कब्जा ले सकता है, प्रबंधन अपने हाथ में ले सकता है, या संपत्ति की नीलामी कर सकता है।
 बैंक बिना नोटिस दिए या मनमाने तरीके से संपत्ति नहीं ले सकता। [3] उधारकर्ता को ष्ठक्रञ्ज (ऋण वसूली न्यायाधिकरण) से संरक्षण कैसे मिलता है?  यदि बैंक की कार्रवाई गलत, जल्दबाज़ी में या कानून के विरुद्ध है, तो उधारकर्ता धारा 17 स््रक्रस्न्रश्वस्ढ्ढ के तहत ष्ठक्रञ्ज (ष्ठद्गड्ढह्ल क्रद्गष्श1द्गह्म्4 ञ्जह्म्द्बड्ढह्वठ्ठड्डद्य) में आवेदन कर सकता है। ष्ठक्रञ्ज से मिलने वाले  प्रमुख संरक्षण बैंक की अवैध कार्रवाई पर स्टे (रोक) मिल सकती है।
संपत्ति पर कब्जा या नीलामी रोकी जा सकती है।

बैंक को वैकल्पिक समाधान (जैसे ह्रञ्जस्) पर विचार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
ष्ठक्रञ्ज आम नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा कवच है। 4 रिकवरी एजेंट की अवैध कार्रवाई से कैसे बचाव करें? सुप्रीम कोर्ट और क्रक्चढ्ढ ने रिकवरी एजेंटों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट और क्रक्चढ्ढ  की मुख्य गाइडलाइन
रिकवरी एजेंट धमकी, गाली, अपमान या शारीरिक दबाव नहीं डाल सकते।
वे सुबह 7 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं कर सकते।  वे घर या कार्यस्थल पर जबरदस्ती प्रवेश नहीं कर सकते।  वे उधारकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुँचा सकते। यदि एजेंट अवैध व्यवहार करे तो क्या करें? 
संबंधित बैंक में लिखित शिकायत दें। पुलिस में शिकायत दर्ज करें। आरबी या बैंकिंग लोकपाल से शिकायत करें। यदि आवश्यक हो, तो डीआरटी या उच्च न्यायालय से संपर्क करें। कानून आम नागरिकों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करता है।
[5] ऋण वसूली पर रोक कैसे लगवाएं? यदि बैंक संपत्ति पर कब्ज़ा करने या उसकी नीलामी करने की कार्यवाही शुरू करता है, तो उधारकतार्:

1. डीआरटी में धारा 17 के तहत आवेदन करता है। 2. आवेदन के साथ बैंक का नोटिस, दस्तावेज़ और अन्य साक्ष्य संलग्न करता है। 3. न्यायाधिकरण से अंतरिम राहत (रोक) का अनुरोध करता है। यदि मामला प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होता है, तो डीआरटी बैंक की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा सकता है। 6] एकमुश्त निपटान (ओटीएस) क्या है? ओटीएस (एकमुश्त निपटान) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बैंक और उधारकर्ता आपसी सहमति से पूरे ऋण का निपटान कम राशि में करते हैं। 
ओटीएस के लाभ- लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाव। ब्याज और जुर्माने में राहत। संपत्ति बचाने का अवसर। मानसिक तनाव और खर्चों में कमी। उचित कानूनी सलाह से ओटीएस प्रस्ताव को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जा सकता है।
[7] लोक अदालत के माध्यम से विवाद का समाधान लोक अदालत एक वैकल्पिक विवाद निपटान मंच है, जहाँ बैंक और उधारकर्ता आपसी समझौते से मामला समाप्त कर सकते हैं।

लोक अदालत के फायदे तेज़ और सस्ता न्याय । लंबी सुनवाई की आवश्यकता नहीं।समझौता अंतिम और बाध्यकारी होता है। रिश्ते खराब हुए बिना समाधान संभव होता है।  लोक अदालत आम नागरिक के लिए न्याय का सरल और प्रभावी मार्ग है।
आम जनता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव बैंक की हर नोटिस को गंभीरता से लें।
समय रहते योग्य कानूनी सलाह लें। रिकवरी एजेंट के दबाव में आकर गलत समझौते न करें। अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया को समझें। संवाद और समाधान का रास्ता पहले अपनाएँ । निष्कर्ष न चुका पाना कोई अपराध नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को समझना और सही समय पर सही कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। स््रक्रस्न्रश्वस्ढ्ढ कानून, ष्ठक्रञ्ज, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन, और लोक अदालत ये सभी आम नागरिक की रक्षा और समाधान के लिए बने हैं। सही जानकारी और कानूनी मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति, सम्मान और अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

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