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Missing People In Delhi 2026: दिल्ली से हो रहे रोजाना लोग गायब, 15 दिनों में लगभग 803 लोग लापता 

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दिल्ली ,यशोदा  Published by: , Date: 05/02/2026 04:56:53 pm Share:
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संक्षेप

दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली जहाँ हर साल लाखों लोग नौकरी, पढ़ाई और जीवन के नए अवसरों की तलाश में आते हैं।

विस्तार

दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली जहाँ हर साल लाखों लोग नौकरी, पढ़ाई और जीवन के नए अवसरों की तलाश में आते हैं। अब एक गंभीर सामाजिक समस्या का सामना कर रही है। वर्ष 2026 में राजधानी में रोज़ाना लोगों के गुम होने की घटनाएँ बढ़ गई हैं। यह केवल अपराध की समस्या नहीं है, बल्कि प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता भी लोगों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है। पिछले कुछ ही दिनों में राजधानी दिल्ली से अनगिनत मामलों में लोग अचानक गायब हो रहे हैं। इनमें छात्र, महिलांए, और नाबालिक सभी शामिल हैं। गायब हुए लोगों में से अब तक एक का भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। गयाब लोगों की संख्या लगभग 806 है। परिवारों की आपबीती सुनने पर यह स्पष्ट होता है कि पुलिस अक्सर गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश में धीमी और ढुलमुल रवैये अपनाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। कई बार तो उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है या पुलिस विभाग उन्हें यही कहकर टाल देता है कि “थोड़ी देर इंतजार करें, सुराग मिलने पर सूचित किया जाएगा।” इस प्रकार की निष्क्रियता न केवल पीड़ित परिवारों की मानसिक स्थिति को बिगाड़ रही है, बल्कि अपराधियों को भी हौसला दे रही है।

 

दिल्ली में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या का कारण केवल अपराध या अपहरण नहीं है। शहर में बढ़ता तनाव, मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ, साइबर अपराध और आर्थिक दबाव भी लोगों को असुरक्षित बना रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी और मानव संसाधनों की कमी पुलिस की जांच प्रक्रिया को कमजोर कर रही है। गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में डिजिटल ट्रैकिंग और आईएमईआई आधारित तकनीक का उपयोग करना अपेक्षित है, लेकिन वास्तविकता में यह तकनीक सीमित रूप से ही इस्तेमाल हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक संगठन लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित गुमशुदा सेल की स्थापना आवश्यक है। गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या केवल दिल्ली की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए चेतावनी है। जब प्रशासन और कानून प्रवर्तन संस्थान अपने कर्तव्यों में गंभीर रूप से चूकते हैं, तब समाज में भय और असुरक्षा फैलती है। नागरिकों का विश्वास टूटता है और अपराधियों के लिए अवसर बढ़ता है।