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राजस्थान: हिंदी के सार्थक स्वरूप और संस्कार को बचाकर ही भाषा का होगा विस्तार
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संक्षेप
राजस्थान: हरियाढाणा हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के महत्व और उसके व्यापक प्रयोग को लेकर विचार व्यक्त किए गए।
विस्तार
राजस्थान: हरियाढाणा हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के महत्व और उसके व्यापक प्रयोग को लेकर विचार व्यक्त किए गए। हिंदी को भारत की राजभाषा बताते हुए कहा गया कि यह बोलने, समझने और लिखने में सरल भाषा है। विश्व में हिंदी बोलने वालों की संख्या दूसरे स्थान पर है और भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। भारत में अलग-अलग धर्म, क्षेत्रीय भाषाएं, बोलियां, रीति-रिवाज और संस्कृतियां मौजूद हैं। ऐसे में कहा जाता है कि “12 कोस पर भाषा बदल जाती है और 8 कोस पर पानी।” विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद को आसान बनाने में आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीनी अनुवाद, आवाज पहचानने वाली तकनीक और बोलकर लिखने जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। तकनीक भाषाओं को समाप्त करने के बजाय उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग पर जोर देते हुए कहा गया कि अन्य भाषाओं को सीखने से ज्ञान का विस्तार होता है, लेकिन अपनी मातृभाषा के प्रति हीन भावना नहीं आनी चाहिए। अन्य भाषाओं को सीखने और अपनाने के साथ अपनी मातृभाषा के महत्व को समझना तथा उसका दैनिक जीवन में अधिक से अधिक प्रयोग करना आवश्यक है। हिंदी आज विश्व भाषा के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि इसके लिए भाषा की चुनौतियों और कमजोरियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। हिंदी को उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय तथा अन्य राज्यों में अधिक प्रभावी कार्यभाषा के रूप में बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। साथ ही हिंदी के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना उसे सरल और सहज बनाने पर जोर दिया गया। विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि भाषा अपने साथ संस्कृति लेकर चलती है और संस्कृति की वाहक होने के कारण वह समाज के विचारों और जीवनशैली को भी प्रभावित करती है। इसलिए हिंदी को समृद्ध बनाने, उसके मूल स्वरूप को बनाए रखने और विकृत होने से बचाने के लिए इसका अधिक से अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। यही हिंदी दिवस की गरिमा, महत्व और सार्थकता होगी। देशभर के स्कूलों में हिंदी दिवस उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की शपथ भी दिलाई जाती है। मांगीलाल जोशी ने हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
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