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उत्तर प्रदेश: इंसानियत, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक, साल में मनाई जाती हैं तीन ईदें

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Namita Chauhan, Date: 27/05/2026 06:09:19 pm Share:
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  • Edited By.: Namita Chauhan,
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: दुनिया भर के मुसलमानों के लिए ईद खुशी, इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: दुनिया भर के मुसलमानों के लिए ईद खुशी, इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक है। ईद का अर्थ होता है बार-बार आने वाली खुशी, आमतौर पर लोग दो ईद पर्व को जानते हैं। लेकिन असल में मुसलमान साल में तीन बार ईद मनाते हैं, ईद उल फितर, ईद उल अजहा और ईद मिलाद उन नबी तीनों ईद का अपना अलग महत्व होता है। पहला, ईद उल फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। यह रमजान के महीने के खत्म होने के बाद मनाई जाती है। 1 महीने तक रोजा रखने के बाद जब, चांद दिखाई देता है तो अगले दिन ईद का जश्न होता है। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं। जकात देते हैं और एक दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं। घरों में सेवइयां और मीठे पकवान बनाए जाते हैं, जो इस त्यौहार की एक पथ पहचान है। दूसरा, ईद उल अजहा जिसे बकरीद कहा जाता है।  

इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने जीलहि ज्जा की दसवीं तारीख को मनाई जाती है। इस साल भारत में यह 28 मई को मनाई जाएगी. यह त्यौहार हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने की तैयारी दिखाई थी। इस दिन मुसलमान जानवर की कुर्बानी करते हैं और उसका मांस जरूरतमंदों में बांटते हैं। इसका हज से भी गहरा संबंध है। तीसरा, ईद मिलाद उन नबी, पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। इस दिन लोग उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करते हैं। कई जगहों पर जुलूस और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लड़की कुछ लोग इसे सादगी के साथ मनाते हैं। गरीबों को खाना खिलाना और मदद करना भी इस दिन की एक अहम परंपरा है। तीनों ईद अलग-अलग संदेश देती है, रोजा के बाद खुशी, कुर्बानी का जज्बा और पैगंबर के आदर्शों का सम्मान। यही ईद की असली खूबसु रती है।