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उत्तर प्रदेश: मुरादाबाद ईओ पर फर्जी मुकदमा, भाजपा नेता ने निलंबन की करी मांग 

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उत्तर प्रदेश  Published by: Raju , Date: 27/02/2026 11:26:49 am Share:
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  • 27/02/2026 11:26:49 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: भाजपा नेता ने नगर विकास मंत्री ओर विधानपरिषद की संसदीय समाजिक सदभावना समिति सभापति के समक्ष कमिश्नर मुरादाबाद की जांच आख्या में गवन, अनियमितताओं एवं फर्जी मुकदमा लिखवाने वाले ईओ को निलंबित करने की मांग।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: भाजपा नेता ने नगर विकास मंत्री ओर विधानपरिषद की संसदीय समाजिक सदभावना समिति सभापति के समक्ष कमिश्नर मुरादाबाद की जांच आख्या में गवन, अनियमितताओं एवं फर्जी मुकदमा लिखवाने वाले ईओ को निलंबित करने की मांग। फतेहगंज पश्चिमी भाजपा नेता आशीष अग्रवाल ने नगर विकास मंत्री ए के शर्मा से उनके सरकारी आवास पर भेंट के साथ और विधानपरिषद की संसदीय समाजिक सदभावना समिति सभापति के समक्ष कमिश्नर मुरादाबाद की जांच आख्या में गवन, अनियमितताओं एवं फर्जी मुकदमा लिखवाने वाले ईओ को निलंबित करने की मांग । विधानपरिषद याचिका समिति ने नगर विकास विभाग के विशेष सचिव अनुज झा को रामपुर और बरेली के अधिकारियों की आख्या पर जल्द कार्यवाही कर अगली समिति के बैठक में की गई कार्यवाही से अवगत कराने के निर्देश दिए।

नगर पंचायत सैफनी जिला रामपुर में  पूर्व की तैनाती के दौरान ईओ पुष्पेंद्र राठौर एवं चेयरमैन द्वारा लाखों रुपयों के गवन और भ्रष्टाचार की जांच में मंडल आयुक्त मुरादाबाद के आख्या पर दोषी पाए जाने में दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर ईओ के निलंबन एवं फतेहगंज पश्चिमी में किए गए सभी भुगतानों की शासन के माध्यम टी ए सी जांच कराकर यहां के गवन घोटालों में लिप्त ईओ पर कड़ी कठोर कार्यवाही करने को मांग पत्र दिया। लखनऊ परिषद की याचिका समिति में आज सभापति सी पी सिंह, एम एल सी अनूप गुप्ता, एम एल सी गोपाल अंजान के साथ अन्य विधायकों की समिति के समक्ष पूरे प्रकरण की सुनवाई की गई। फर्जी मुकदमा लिखाने वाले ईओ को निलंबित कर कार्यकर्ताओं का सम्मान बनाए रखने के साथ भाजपा नेता आशीष अग्रवाल ने दिए पत्र के माध्यम बताया कि जिलाधिकारी बरेली की आख्या आंकलन कर भाजपा नेता पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले ईओ के खिलाफ तत्काल सख्त कार्यवाही करने एवं पार्टी कार्यकर्ता पर दर्ज मुकदमा निरस्त किया जाय। ढाई माह पूर्व मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री जी के कार्यालय द्वारा जिलाधिकरी बरेली को दिए गए निर्देश दिनांक 22 नवंबर को अधिशासी अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर द्वारा नगर के एक व्यापारी के प्रतिष्ठान पर बिना नोटिस दिए जेसीबी लेकर तोड़फोड़ करने का भय दिखाकर व्यापारी राहुल गुप्ता से दो लाख रुपये रिश्वत मांगने एवं भाजपा के निवर्तमान चैयरमैन प्रत्याशी/अध्यक्ष व्यापार मंडल आशीष अग्रवाल द्वारा बिना नोटिस बुलडोजर कार्यवाही एवं रिश्वत मांगने का विरोध करने पर सरकारी काम में बाधा डालने एवं सरकारी दस्तावेज फाड़ने का झूठा आरोप लगाकर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने को लेकर त्रिस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। पर ईओ के प्रभाव के कारण आख्या जानबूझकर लंबित रखी जा रही थी जिसमें लगभग ढाई माह बाद प्रदेश सरकार के कई मंत्रीगणों, विधानसभा परिषद कमेटी एवं शासन के उच्चाधिकारियों के दर्जन भर से ज्यादा निर्देशों के बाद जिला प्रशासन द्वारा प्रकरण की आख्या भेजी गई। त्रिस्तरीय जांच कमेटी में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, अपर जिलाधिकारी न्यायिक, एस पी नार्थ बरेली तीनो वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर जिलाधिकारी बरेली ने 5 फरवरी को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री  को भेज दी गई।

जांच आख्या के अनुसार सर्वप्रथम त्रिस्तरीय कमेटी ने ईओ द्वारा दर्ज करवाएं मुकदमे को झूठा करार दिया है जिसके आधार पर प्रार्थी के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे के निरस्त करने के आदेश संबंधित अधिकारी को दिये जाना शेष हैं। आख्या में मुकदमा झूठा बताये जाने के बाद भी मुकदमा निरस्त करने के निर्देश नहीं दिए गए। स्थानीय पुलिस भी मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाने में आनाकानी कर रही है। जांच आख्या में सम्मलित व्यापारियों के बयान में साफ कहा गया है कि ईओ ने अतिक्रमण के नाम पर दो लाख रुपये रिश्वत मांगी गई। मगर जांच कमेटी ने साक्ष्य का अभाव दर्शाकर ईओ को क्लीन चिट दे दी। भाजपा नेता आशीष अग्रवाल के खिलाफ ईओ ने अपने पद का दुरुपयोग कर साजिश के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराकर एक प्रतिष्ठित व्यापारी एवं भाजपा नेता का आर्थिक, मानसिक उत्पीड़न कर मान सम्मान को नुकसान पहुंचाया, जिसके कारण प्रदेश सरकार की छवि भी धूमिल की जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है। ऐसे भ्रष्ट अधिशासी अधिकारी को अभिलम्ब तैनाती स्थल से हटाकर निलंबित किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य कोई भी अधिकारी अवैध बसूली करने के लिए अपने पद का दुरुप्रयोग न करे। एवं किसी समाजसेवी अथवा भी पार्टी पदाधिकारी के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज न हो। जिसके कारण किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों का मनोवल बना रहे।