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उत्तर प्रदेश: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अभियोजन समीक्षा बैठक, प्रभावी पैरवी से दोषसिद्धि बढ़ाने के निर्देश
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: 05 फरवरी, 2026 (सू0वि0)- जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता मे अभियोजन की समीक्षा बैठक कलेक्टेªट सभागार मे सम्पन्न हुयी। बैठक में बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 04 वादों में सजा हुआ।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: 05 फरवरी, 2026 (सू0वि0)- जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता मे अभियोजन की समीक्षा बैठक कलेक्टेªट सभागार मे सम्पन्न हुयी। बैठक में बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 04 वादों में सजा हुआ। कुल 09 वादों में पक्षदोहिता के आधार पर अभियुक्त रिहा हुए। भारतीय दण्डा संहिता के अन्तर्गत 28 वाद निस्तारित हुए, जिसमें से 07 में अभियुक्त को सजा हुआ तथा 17 वाद सुलह के आधार पर समाप्त हुए। 04 वाद कमिट हुए तथा अन्य अधिनियम के अन्तर्गत 12 वादों का निस्तारण हुआ, जिसमें से 10 वादों में अभियुक्तों को सजा हुआ तथा 01 अभियुक्त रिहा हुआ तथा 01 वाद दाखिल दफ्तर हुआ। कुल 252 वारण्ट निर्गत हुए जिसके सापेक्षा 197 वारण्ट तामिल हुए तथा 147 गवाह उपस्थित हुए जिसमें से 141 गवाह परीक्षित हुए तथा 05 गवाह अपरीक्षित हुए क्योंकि पीठासीन अधिकारी अवकाश पर रहे तथा अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से विरत रहे। कुल 95 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए जिसमें 04 जमानत स्वीकृत हुए तथा 91 जमानत प्रार्थना पत्र अस्वीकृत हुए। बैठक में जिलाधिाकरी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तथा लोक अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा कर ले। यदि पुनः अपील किया जाना शासकीय हित में हो तो पुनः अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करे। भविष्य में पक्षद्रोहिता तथा संदेह के आधार पर रिहा होने वाले वादों की समुचित पैरवी सुनिश्चित किया जाए। अधिक से अधिक वादों में प्रभावी पैरवी कर अभियुक्तों को सजा दिलाने का प्रयास सुनिश्चित किया जाए। सम्बन्धित अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि वह प्रभावी पैरवी करते हुए अधिक से अधिक वादों में दोषसिद्धि कराते हुए विमुक्त हुए वादों में विमुक्ति आख्या समय से तैयार कर प्रस्तुत करे। न्यायहित में आवश्यक हो तो अपील सम्बन्धित न्यायालयों में किया जा सके। जिन वादों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे है। कुछ वाद में पक्षद्रोही हुए गवाहों पर मुकदमा कर सजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाए, जिससे सुधार हो सके। जिन पत्रावलियों में गवाहों के पक्षद्रोही होने की सम्भावना हो उनके लम्बी तिथि ली जाए तथा जिसमें सजा की सम्भावना हो उनमें नजदीक की तिथि लगवायी जाए। हमारा प्रयास पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए। इसके लिए पत्रावली में वादी के अलावा अन्य उपलब्ध साक्षियों का भी साक्ष्य कराया जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 दिनेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अभियोजन आनन्द कुमार पाण्डेय, क्षेत्राधिकारी नगर शेखर सेंगर, जिला शासकीय अधिवक्ता(फौजदारी) कृपाशंकर राय एवं अन्य संबंधित जनपदस्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।