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Alleged Fake Encounter: पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने के लगे आरोप, सीसीटीवी और लोकेशन डेटा सुरक्षित रखने के दिए निर्देश
- Photo by : NCR SAMACHAR
संक्षेप
दिल्ली: राजधानी दिल्ली के साकेत कोर्ट ने एक आरोपी द्वारा लगाए गए फर्जी एनकाउंटर, अवैध हिरासत और पुलिस प्रताड़ना के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करने आदेश दिए हैं।
विस्तार
दिल्ली: राजधानी दिल्ली के साकेत कोर्ट ने एक आरोपी द्वारा लगाए गए फर्जी एनकाउंटर, अवैध हिरासत और पुलिस प्रताड़ना के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करने आदेश दिए हैं। अदालत ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों की लोकेशन डिटेल और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। पुलिस की मुठभेड़ में दो आरोपी गिरफ्तार जानकारी के मुताबिक 29 जून की रात करीब 12:15 बजे जल विहार क्षेत्र में दो आरोपी किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने अचानक पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों के पैरों में गोली मारी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान नजफगढ़ के रहने वाले 32 वर्षीय प्रमोद कुमार उर्फ टूटन और 34 वर्षीय राजेश कुमार के रूप में की गई हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रमोद के खिलाफ 113 और राजेश के खिलाफ 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। मौके से हथियार, कारतूस और खोखे बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा हैं की आरोपी की गिरफ़्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था, जहाँ पेशी के दौरान आरोपी प्रमोद कुमार ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उसने दावा किया की उसे सराय काले खां बस अड्डे से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था और बाद में एक अज्ञात स्थान पर ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। आरोपी का कहना है कि पूरी मुठभेड़ की कहानी पहले से रची गई थी। हिरासत में प्रताड़ना और गोली मारने का आरोप पेशी के दौरान आरोपी ने अदालत में बताया की पुलिसकर्मी ने उसे धमकी दी की वह उसके खिलाफ कई मुकदमे होने के कारण उसका एनकाउंटर किया जाएगा। उसने आरोप लगाया की उसका सिर कपड़े से ढककर एक कमरे में ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट की गई, उल्टा लटकाकर पूछताछ की गई और बाद में दूसरी जगह ले जाकर घटनास्थल को मुठभेड़ जैसा दिखाने की कोशिश की गई। आरोपी ने यह भी दावा किया है की उसे दीवार के सामने बैठाकर आंखें बंद करने को कहा गया और उसके पैर में गोली मार दी गई। उसने यह भी आरोप लगाया हैं की इसी प्रकार की कार्रवाई दूसरे आरोपी राजेश के साथ भी की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मौजूदगी का दावा बताया जा रहा हैं की प्रमोद ने अदालत में यह भी आरोप लगाया की मुठभेड़ के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे, जिन्हें उसने डीसीपी स्तर का अधिकारी बताते हुए हेमंत तिवारी के रूप में पहचाना। आरोपी के इस दावे को भी अदालत ने जांच के दायरे में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के दिए निर्देश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस का कोई अधिकारी शामिल नहीं होगा, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से की जा सके। कोर्ट ने संबंधित स्पेशल लॉ एंड ऑर्डर को निर्देश दिया है की एनकाउंटर में शामिल पुलिस टीम के सभी सदस्यों की लोकेशन डिटेल सुरक्षित रखी जाए। साथ ही घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों के उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज भी संरक्षित किए जाएं, ताकि जांच में सभी तकनीकी सबूतों का उपयोग किया जा सके। फिलहाल अदालत ने केवल आरोपी द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही किया जाएगा।
