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मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश: निर्मला पाराशर और साक्षी पाराशर की पुस्तकों का विमोचन

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मध्य प्रदेश  Published by: Arun Shrivastava , Date: 03/03/2026 04:26:05 pm Share:
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  • 03/03/2026 04:26:05 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: विगत दिनों श्रीमती निर्मला पाराशर और उनकी बेटी साक्षी पाराशर की नव प्रकाशित कृतियों का विमोचन समारोह पूर्व विधायक श्रीमती साधना स्थापक, महंत बालकदास जी, पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य डॉ अ

विस्तार

मध्य प्रदेश: विगत दिनों श्रीमती निर्मला पाराशर और उनकी बेटी साक्षी पाराशर की नव प्रकाशित कृतियों का विमोचन समारोह पूर्व विधायक श्रीमती साधना स्थापक, महंत बालकदास जी, पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य डॉ अरूण तिवारी, स्थानीय पीजी कॉलेज की सेवा निवृत्त प्रध्यापक श्रीमती सुनीता गुप्ता के सारस्वत आतिथ्य में और वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती जी की पूजा अर्चना के साथ हुआ । कु. विद्या मालवीय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । मंचासीन अतिथियों का पुष्प माला से स्वागत राजेंद्र पाराशर, कपिल पाराशर, मंजुला शर्मा और अर्चना नामदेव द्वारा किया गया । स्वागत गीत कु. शीतल सोनी ने प्रस्तुत किया । करतल ध्वनि के बीच श्रीमती निर्मला पाराशर की कृति "मातृभाषा का महायज्ञ" का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया । इस अवसर पर निर्मला पाराशर ने कहा कि हिन्दी भाषा के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है वह कष्टदायक है और उन्होंने इसे ही अपनी किताब में व्यक्त किया है । 

दूसरी कृति कु. साक्षी पाराशर द्वारा सृजित "भाभी सखी सहेली" का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया । कु साक्षी ने कहा कि पारिवारिक रिश्ते अपेक्षा की भेंट चढ़ रहे हैं। कोई भी रिश्ता प्यार स्नेह और पारदर्शिता से मजबूत हो सकता है इसे उन्होंने अपनी किताब में व्यक्त किया है ।‌ इस अवसर पर चेतना परिवार की ओर से मंजुला शर्मा, विजय नामदेव ने दोनों कृतिकारों को सम्मानित किया। डां मंजुला शर्मा ने दोनों रचनाकारों की प्रथम कृति को क्रय किया ।‌ इस अवसर पर अपने उद्बोधन में सुनीता गुप्ता ने कृतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिन्दी भाषा को राष्ट् भाषा बनाने के लिए ऐसी कृतियों की बहुत आवश्यकता है । महंत बालकदास जी ने कहा कि आज फिर संयुक्त परिवार की आवश्यकता महसूस होने लगी है । संयुक्त परिवार समाज को बेहतर दिशा में ले जाते हैं 

और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाते है । डॉ अरूण तिवारी ने कहा कि साहित्य जागरूकता फैलाने का काम करता है, साहित्य सृजन सहज और सरल प्रक्रिया नहीं है यह साहित्यकार के भावों का चित्रण होता है । कार्यक्रम के अध्यक्ष कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दी संस्कारों की भाषा है, संस्कृति को रेखांकित करती है और रिश्तों को मजबूत करती हैं ‌। हम इस बात का ध्यान रखें कि हमारे बच्चे हिन्दी से दूर न हो यदि वे हिंदी से जुड़े रहेंगे तो संस्कारों से, संस्कृति से और परंपराओं से भी जुड़े रहेंगे ‌। कार्यक्रम में डां मंजुला शर्मा और महेश अधरूज ने भी अपने विचार रखे । कार्यक्रम का सफल संचालन सत्यप्रकाश बसेड़िया ने किया और आभार प्रदर्शन नगेन्द्र त्रिपाठी ने किया ‌। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे ।