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मध्य प्रदेश: पीएम आवास योजना परिसर में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर भड़के रहवासी
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: इंदौर के भूरी टेकरी स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के अरावली परिसर में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार को लेकर रहवासियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
रहवासियों का आरोप है
विस्तार
मध्य प्रदेश: इंदौर के भूरी टेकरी स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के अरावली परिसर में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार को लेकर रहवासियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। एक रहवासी ने बताया कि जब वह अपने भाई के साथ फ्लैट मर्ज कराने की अनुमति लेने नगर निगम पहुंचा, तो अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर मना कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “जैसे बाकी लोगों ने कर लिया है, वैसे आप भी बिना अनुमति कर लो।” इतना ही नहीं, परिसर में फायर सेफ्टी सिस्टम की एक्सपायरी डेट भी निकल चुकी है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी इसकी जांच करने नहीं पहुंचा है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। रहवासियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना और नगर निगम के अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।
रहवासियों का आरोप है कि परिसर में कई लोगों ने बिना अनुमति के दो-दो फ्लैट को तोड़कर एक कर लिया है, जिससे भवन की मूल संरचना के साथ छेड़छाड़ की गई है। यह कार्य न केवल आवंटन पत्र की शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि मध्य प्रदेश प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम के नियमों के भी खिलाफ है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में रहवासी पहले भी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन नगर निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मामला उस समय और गरमा गया जब पिछले मंगलवार जनसुनवाई में रहवासियों ने कलेक्टर से सीधे शिकायत की। रहवासियों ने निगम अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अवैध रूप से फ्लैट मर्ज करने वालों के साथ सांठगांठ कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बयान के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, परिसर में मूलभूत समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। रहवासियों के अनुसार, सीपेज, दीवारों में सीलन, टॉयलेट का पानी नीचे के फ्लैट में जाना और बाउंड्री वॉल जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। शनिवार 5 जुलाई 2025 को नगर निगम के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनकी जगह एनजीओ के कार्यकर्ताओं को भेज दिया गया, जिन्हें योजना और नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
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