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राजस्थान: श्री सांवलियाजी मंदिर में विवाद मोरपंख बैन और वीआईपी कल्चर पर उठे सवाल

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राजस्थान  Published by: Bharat Bunkar , राजस्थान  Edited By: Kunal, Date: 27/04/2026 10:18:51 am Share:
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  • 27/04/2026 10:18:51 am
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संक्षेप

राजस्थान:  विश्व प्रसिद्ध श्रीसांवलियाजी मंदिर मंडल ने मंदिर परिसर में मोरपंख और 56 भोग चढ़ाने पर रोक लगा दी है। आम श्रद्धालुओं के लिए फोटो-वीडियो लेना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है, मंदिर मंडल का तर्क

विस्तार

राजस्थान:  विश्व प्रसिद्ध श्रीसांवलियाजी मंदिर मंडल ने मंदिर परिसर में मोरपंख और 56 भोग चढ़ाने पर रोक लगा दी है। आम श्रद्धालुओं के लिए फोटो-वीडियो लेना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है, मंदिर मंडल का तर्क है कि भीड़ और अव्यवस्था के चलते यह फैसला लिया गया, मगर वही बड़ा सवाल ये है – क्या यह रोक मंदिर मंडल के महाराज, पदाधिकारियों और उनके खास चहेतों पर भी लागू होगी,नहीं ये नहीं होगी ?  सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंदिर में हर बड़े आयोजन पर वीआईपी दर्शन, फोटो-वीडियो और विशेष पूजा की छूट दी जाती है । आम भक्त लाइन में घंटों खड़ा रहता है, वहीं खास लोगों के लिए गर्भगृह तक के दरवाजे खुल जाते हैं,सरकार का हर जनप्रतिनिधि मंदिर में दर्शन करते हुए के फोटो खुद पोस्ट भी करता है मगर कोई आम आदमी फोटो वीडियो के लिए अगर फोन निकालता है तो गार्ड व मंदिर के कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें डराया जाता है।
नया खुलासा मोरपंख बैन से मंदिर के बाहर दुकान लगाने वाले हजारों गरीब परिवारों का रोजगार छिन गया है । साथ ही गर्भगृह जाने के लिए बनाए गए विशेष रास्ते आज भी आम नागरिक के लिए बंद हैं ! सिर्फ VIP को एंट्री मिलती है ।

कच्ची बस्ती फेडरेशन एवं फूल विक्रेता संघ मानसरोवर जयपुर के संगठन मंत्री रेखा देवी ने भी इस फैसले की कड़ी निंदा की है । उन्होंने कहा कि मोरपंख बेचकर पेट पालने वाले हजारों गरीब परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली गई है । संगठन मंत्री ने मांग की है कि मोरपंख पर लगी रोक तुरंत हटाई जाए और गरीब दुकानदारों के रोजगार को बचाया जाए। फूल विक्रेताओं के हुनर और दस्तकारी की चर्चा आम मध्यम वर्ग से लेकर अच्छे घरानों तक में हो रही है,मगर चित्तौड़गढ़ जिले के सांवलिया सेठ मंदिर में ऐसे फूल-मोरपंख विक्रेताओं के साथ सिस्टम पूरी तरह 'खाऊं नीति' पर चल रहा है । इन्हें आये दिन परेशान किया जाता है ! जिससे इनका रोजगार समाप्त हो रहा है । इस ओर तुरंत ध्यान देकर सिस्टम के गलत कारनामों पर रोक लगना जरूरी है।

सवाल ये उठते हैं, जब भीड़ और अव्यवस्था कारण है तो नियम सबके लिए एक समान क्यों नहीं ? क्या भगवान के दरबार में भी आम और खास का भेदभाव चलेगा ?  56 भोग और मोरपंख से अव्यवस्था फैलती है या वीआईपी कल्चर से ?मंदिर मंडल बताए – महाराज और उनके करीबी बिना रोक-टोक फोटो-वीडियो कैसे बना लेते हैं ? गरीब दुकानदारों की रोजी-रोटी का क्या होगा ? श्री सांवलियाजी सभी के हैं । यहां आस्था का व्यापार नहीं होना चाहिए। अगर रोक लगानी है तो पहले वीआईपी कल्चर पर लगाओ। आम भक्त तो वैसे ही अनुशासन में रहता है। मंदिर मंडल को जवाब देना चाहिए कि क्या भगवान के दर पर भी राजनीति हावी है ? श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ बंद हो । नियम सबके लिए एक हों।