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राजस्थान: नाबार्ड परियोजनाओं के निरीक्षण में कलेक्टर देवेंद्र कुमार बोले—ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई रफ्तार
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संक्षेप
राजस्थान: जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने नाबार्ड द्वारा संचालित कृषि अवसंरचना निधि (AIF) के अंतर्गत स्थापित इकाइयों एवं संस्थाओं का दौरा कर प्रगति की समीक्षा की।
कलेक्टर कुमार ने
विस्तार
राजस्थान: जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने नाबार्ड द्वारा संचालित कृषि अवसंरचना निधि (AIF) के अंतर्गत स्थापित इकाइयों एवं संस्थाओं का दौरा कर प्रगति की समीक्षा की। इसके बाद जिला कलेक्टर ने मुंडवा ब्लॉक के ऋण गांव में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर इनपुट उपलब्धता, प्रसंस्करण एवं विपणन से जुड़ी समस्याओं के बारे में जाना । उन्होंने कहा कि एफपीओ का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को संगठित कर सामूहिक रूप से सशक्त बनाना है, जिससे उन्हें प्रौद्योगिकी, संसाधन, वित्त एवं बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सके । इसके पश्चात कलेक्टर कुमार ने मेड़ता स्थित एफपीओ का निरीक्षण किया । कुमार ने कहा कि एफपीओ में अधिकाधिक सदस्य जोड़कर बिचौलियों की भूमिका कम करने और उत्पादन आधारित व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए । इसी क्रम में जिला कलेक्टर ने रोहिना प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS) का भी निरीक्षण किया जहां उन्होंने नाबार्ड के सहयोग से निर्मित गोदाम का अवलोकन किया। इस प्राथमिक कृषि ऋण समिति में समृद्धि’ दृष्टिकोण के तहत कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से डिजिटलीकृत किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और नए व्यावसायिक अवसरों में वृद्धि होगी । कलेक्टर ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पैक्स को सिंगल विंडो के रूप में विकसित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बनाना है। अब पैक्स बहुउद्देशीय इकाई के रूप में विकसित होकर डिपार्टमेंटल स्टोर, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी विभिन्न गतिविधियां संचालित कर सकता है। कलेक्टर कुमार के निरीक्षण के दौरे के दौरान डीडीएम नाबार्ड मोहित कुमार सहित संबंधित अधिकारी, एफपीओ प्रतिनिधि, पैक्स पदाधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे।
कलेक्टर कुमार ने अथियासन में स्थापित ‘हावेगो फूड्स एंड स्पाइसेज’ इकाई मे मसालों की प्रसंस्करण और पैकेजिंग कार्य का निरीक्षण किया । इस दौरान नाबार्ड के डीडीएम मोहित कुमार ने जिला कलेक्टर को योजना की जानकारी देते हुए बताया कि उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए सीजीटीएमएसई के तहत ₹2 करोड़ तक के ऋणों पर अधिकतम 7 वर्षों के लिए प्रति वर्ष 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाता है तथा गारंटी शुल्क का वहन सरकार द्वारा किया जाता है, इस योजना के अंतर्गत ₹2 करोड़ तक के ऋणों पर अधिकतम 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित है। एआईएफ को पीएम कुसुम, एमआईडीएच, एएमआई जैसी केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है, जिलेभर में एआईएफ के तहत 40 से अधिक प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं ।
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