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उत्तर प्रदेश: मैलानी पुवायां फर्रुखाबाद रेल लाइन की मांग तेज, बजट और मंजूरी की उठी आवाज

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उत्तर प्रदेश  Published by: Amar Deep , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 11/08/2026 05:48:48 pm Share:
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  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
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  • 11/08/2026 05:48:48 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: फर्रुखाबाददशकों से लंबित मैलानी–पुवायां–फर्रुखाबाद नई रेल लाइन परियोजना को लेकर क्षेत्रवासियों की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। 

विस्तार

उत्तर प्रदेश: फर्रुखाबाददशकों से लंबित मैलानी–पुवायां–फर्रुखाबाद नई रेल लाइन परियोजना को लेकर क्षेत्रवासियों की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से परियोजना को जल्द मंजूरी देने के साथ पर्याप्त बजट आवंटित कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि मैलानी से पुवायां, जलालाबाद होते हुए फर्रुखाबाद तक प्रस्तावित रेल लाइन को लेकर कई बार सर्वे कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक परियोजना निर्माण के चरण तक नहीं पहुंच सकी है। लंबे समय से मिल रहे आश्वासनों के बाद भी काम शुरू नहीं होने से लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, हर चुनाव के दौरान यह रेल परियोजना प्रमुख मुद्दों में शामिल रहती है। जनप्रतिनिधियों की ओर से रेल लाइन के निर्माण को लेकर भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद मामला फिर लंबित हो जाता है। क्षेत्रवासियों का सवाल है कि आखिर परियोजना को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और इसके लिए बजट कब जारी किया जाएगा। लोगों का कहना है कि नई रेल लाइन बनने से मैलानी, पुवायां, जलालाबाद और फर्रुखाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों को बेहतर और सुगम रेल परिवहन की सुविधा मिल सकती है। इससे यात्रियों के समय और खर्च में कमी आने के साथ क्षेत्रीय संपर्क भी मजबूत होगा।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से व्यापार और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। नए बाजार विकसित होने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। इसके अलावा विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी एक कस्बे या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास से जुड़ा जनहित का मुद्दा है। उन्होंने रेल मंत्रालय, केंद्र सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अब केवल सर्वे और आश्वासन तक सीमित न रहकर परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जाए। क्षेत्रवासियों ने परियोजना के लिए पर्याप्त बजट आवंटित करने और निर्माण शुरू करने की समय-सीमा सार्वजनिक करने की भी मांग की है। लोगों का कहना है कि वर्षों से लंबित इस रेल परियोजना को अब कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा और विकास का लाभ मिल सके।