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उत्तर प्रदेश: मोरंग, गिट्टी और सरिया के दाम उछले; घर बनाने का सपना हुआ महंगा

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 21/09/2026 05:28:42 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 21/09/2026 05:28:42 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के सामने अब निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। मोरंग, गिट्टी, बालू, सीमेंट और सरिया समेत जरूरी निर्माण सामग्री के

विस्तार

उत्तर प्रदेश: अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के सामने अब निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। मोरंग, गिट्टी, बालू, सीमेंट और सरिया समेत जरूरी निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से मकान बनाने का बजट लगातार बढ़ रहा है। सीमित आय वाले परिवारों को निर्माण शुरू करने से पहले कई बार खर्च का हिसाब लगाना पड़ रहा है। कई लोग बजट का संतुलन बिगड़ने के कारण निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से कराने को मजबूर हैं। सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र के करही, उसराशहीद, सेहुड़ा, दानोकुइयां, दुधारा, चिउटना, सालेहपुर, टेमारहमत, नव्वागांव, कोहरियावां, महुआरी और उंचहराकला समेत विभिन्न चौराहों पर बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें हैं। यहां निर्माण सामग्री खरीदने पहुंच रहे लोगों को पहले की तुलना में अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है।

 मोरंग 6200 तो गिट्टी 8000 रुपये ट्रॉली  स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक वर्तमान में मोरंग करीब 6200 रुपये ट्रॉली, गिट्टी 8000 रुपये ट्रॉली और बालू करीब 2000 रुपये ट्रॉली बिक रही है। वहीं सीमेंट की एक बोरी की कीमत करीब 350 से 400 रुपये और सरिया की कीमत 6300 रुपये क्विंटल तक पहुंच गई है। हालांकि सामग्री की कीमतों में गुणवत्ता, ब्रांड और ढुलाई के हिसाब से अंतर हो सकता है। महंगे सामान ने बदला घर बनाने का हिसाब  मोहम्मद कासीम ने बताया कि मकान बनाने के लिए पहले जो बजट पर्याप्त लगता था, अब उसी में काम पूरा करना मुश्किल हो रहा है। सामग्री के दाम बढ़ने से निर्माण शुरू करने से पहले ही अतिरिक्त रकम की व्यवस्था करनी पड़ रही है। सुरेन्द्र कुमार के मुताबिक केवल सीमेंट या सरिया ही नहीं, बल्कि मोरंग, गिट्टी और बालू समेत कई जरूरी सामान महंगे होने का असर पड़ रहा है। एक साथ कई सामग्रियों की खरीद करनी पड़ती है, जिससे कुल खर्च काफी बढ़ जाता है।

नफीस अहमद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में निर्माण सामग्री की कीमत के साथ ढुलाई और मजदूरी का खर्च भी जुड़ जाता है। सामान महंगा होने से सीमित आय वाले परिवारों के लिए मकान बनवाना पहले के मुकाबले अधिक कठिन हो गया है। सईद अहमद का कहना है कि कई परिवार बचत और जमा पूंजी के आधार पर धीरे-धीरे मकान बनवा रहे हैं। निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से उन्हें अपनी जरूरतों और मकान के खर्च के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। शकील अहमद ने बताया कि सामग्री महंगी होने के कारण कुछ लोग निर्माण कार्य को एक साथ पूरा कराने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कराने पर विचार कर रहे हैं। इससे मकान पूरा होने में अधिक समय लग सकता है। कारोबारियों ने भी बताई परेशानी 

बिल्डिंग मटेरियल कारोबारी आफताब आलम ने बताया कि सामग्री की कीमत बढ़ने का असर बिक्री पर भी दिखाई देता है। ग्राहक पहले की तुलना में कीमत पूछने और बजट के हिसाब से सामान तय करने में अधिक समय ले रहे हैं। अब्दुर्रहमान के मुताबिक कई ग्राहक पहले जितनी मात्रा में सामग्री खरीदने की योजना बनाकर आते हैं, कीमत जानने के बाद मात्रा कम कर देते हैं। इससे निर्माण कार्य की गति प्रभावित हो रही है। नूरुल बशर ने बताया कि निर्माण सामग्री की कीमतों में गुणवत्ता, ब्रांड और ढुलाई के आधार पर अंतर रहता है। बढ़ी कीमतों का असर ग्राहकों पर पड़ना स्वाभाविक है और कई लोग अब अपनी जरूरत के मुताबिक चरणबद्ध खरीदारी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ती निर्माण लागत ने घर बनाने की योजना बना चुके परिवारों का आर्थिक गणित बदल दिया है। लोगों को अब निर्माण शुरू करने से पहले सामग्री, मजदूरी और ढुलाई समेत पूरे खर्च का नए सिरे से आकलन करना पड़ रहा है।