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वेस्ट बंगाल: छात्रों ने उठाया प्रकृति बचाने का बीड़ा, अरण्य सप्ताह में किया पौधारोपण
- Photo by : social media
संक्षेप
वेस्ट बंगाल: पर्यावरण संरक्षण वन क्षेत्र के विस्तार तथा आने वाली पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से तूफानगंज विवेकानंद विद्यालय की ओर से गरिमापूर्ण ढंग से अरण्य सप्ताह 2026 मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया।
विस्तार
वेस्ट बंगाल: पर्यावरण संरक्षण वन क्षेत्र के विस्तार तथा आने वाली पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से तूफानगंज विवेकानंद विद्यालय की ओर से गरिमापूर्ण ढंग से अरण्य सप्ताह 2026 मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। छात्र-छात्राओं तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी से पूरा कार्यक्रम हरित संदेश का उत्सव बन गया। कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित अतिथियों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा तथा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके पश्चात विद्यालय की ओर से आमंत्रित अतिथियों का बैज, उत्तरीय एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया। दीप प्रज्ज्वलन तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति, पर्यावरण जागरूकता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO), असिस्टेंट डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (ADFO), वन विभाग के विभिन्न बीट अधिकारी, शिक्षा विभाग के असिस्टेंट इंस्पेक्टर (AI), उपमंडलाधिकारी (SDO) सहित अनेक विशिष्ट प्रशासनिक अधिकारी एवं अतिथि उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। चर्चा सत्र में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, वायु प्रदूषण तथा प्राकृतिक संतुलन के बिगड़ने के कारण विश्वभर में अनेक पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। हालांकि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बड़ा करने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी सभी को समान रूप से निभानी होगी। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यालय और परिवार के संयुक्त प्रयास से बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जानी चाहिए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. विक्रमजीत साहा ने अपने संबोधन में कहा, "पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। एक पेड़ केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और रहने योग्य पृथ्वी के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए हमारी अपेक्षा है कि प्रत्येक छात्र-छात्रा कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं निभाए।" उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय में केवल पाठ्यपुस्तकों की शिक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। अरण्य सप्ताह जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अरण्य सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाना, वृक्षारोपण के महत्व के प्रति व्यावहारिक समझ विकसित करना तथा हरित, प्रदूषण-मुक्त और सतत भविष्य के निर्माण का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना था। विद्यालय की इस पहल की उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों तथा स्थानीय लोगों ने विशेष रूप से सराहना की।
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