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हरियाणा: सर्वत्र शिक्षा समिति कार्यालय में मनाई गई डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, शिक्षा और संविधान पर हुआ विचार-विमर्श

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हरियाणा  Published by: Ramesh Kumar (HR) , हरियाणा  Edited By: Kunal, Date: 14/04/2026 03:18:36 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal,
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  • 14/04/2026 03:18:36 pm
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संक्षेप

हरियाणा: सर्वत्र शिक्षा समिति के फतेहाबाद कार्यालय में आज भारत रत्न और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने बाबासाहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी

विस्तार

हरियाणा: सर्वत्र शिक्षा समिति के फतेहाबाद कार्यालय में आज भारत रत्न और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने बाबासाहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्वत्र शिक्षा समिति के राष्ट्रीय परियोजना सलाहकार एवं जनहित ट्रस्ट के चेयरमैन रमेश शाक्य ने की। इस अवसर पर सर्वत्र शिक्षा समिति फतेहाबाद के जिला परियोजना नियंत्रण अधिकारी साधु बरोका, जनहित ट्रस्ट के ज्वाइंट सेके्रटरी विकास सुथार, सोमबीर कुमार, विक्रम कुमार सहित संस्था के अन्य कई सदस्य विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रमेश शाक्य ने उपस्थित सदस्यों को संबोधित किया।

 उन्होंने बाबासाहेब के मूल मंत्र 'शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो' पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही वह सबसे ताकतवर हथियार है जिससे दुनिया को बदला जा सकता है। समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचित और शोषित समाज के उत्थान के लिए शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वत्र शिक्षा समिति भी बाबासाहेब के इसी विजन को 'संस्कार पाठशाला' के माध्यम से धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है, ताकि हर बच्चे को नि:शुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। जिला परियोजना नियंत्रण अधिकारी साधु बरोका और ज्वाइंट सेक्रेटरी विकास सुथार ने भारतीय संविधान में बाबासाहेब के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर जी ने देश को एक ऐसा मजबूत और लचीला संविधान दिया है, जो हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है। हमारे संविधान की बदौलत ही आज समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी आगे बढऩे के समान अवसर प्राप्त हो रहे हैं। अंत में सभी सदस्यों ने यह प्रण लिया कि वे बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।