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उत्तर प्रदेश: पीएम आवास फ्लैट हुआ जर्जर, निर्माण गुणवत्ता और आवंटन पर उठे सवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ajay Saxena , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 07/04/2026 03:30:15 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Saxena ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 07/04/2026 03:30:15 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत शाहपुर तिगड़ी क्षेत्र में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित आवासीय फ्लैट इन दिनों गंभीर विवाद और चिंता का विषय बने हुए हैं।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत शाहपुर तिगड़ी क्षेत्र में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित आवासीय फ्लैट इन दिनों गंभीर विवाद और चिंता का विषय बने हुए हैं। योजना के तहत जिन फ्लैटों को लाभार्थियों को 90 वर्ष के दीर्घकालीन पट्टे पर आवंटित किया गया था, वे मात्र 4–5 वर्षों के भीतर ही जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं। हालत यह है कि इन भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार फ्लैटों की दीवारें इतनी कमजोर हैं कि हाथ लगाने पर ही रेत झड़ने लगती है। कई भवनों में दीवारों और छतों का प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहा है। जगह-जगह गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे किसी भी समय दीवार या छत गिरने की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि निर्माण में प्रयुक्त सीमेंट, रेत और ईंट की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है।


निवासियों का कहना है कि जब फ्लैटों को 90 वर्ष के पट्टे पर दिया गया है, तो यह स्वाभाविक अपेक्षा थी कि भवन मजबूत, सुरक्षित और दीर्घकालीन होंगे। लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि भवन इतनी लंबी अवधि तक टिक ही नहीं पाएंगे। लोगों में भय है कि यदि समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।

अपात्र लोगों को आवंटन का आरोप

मामले को और गंभीर बनाता है यह आरोप कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कई फ्लैट अपात्र व्यक्तियों को आवंटित कर दिए गए हैं। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर ऐसे लोगों को भी फ्लैट दे दिए गए जो पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते। इससे वास्तविक जरूरतमंद लाभ से वंचित रह गए।

किरायेदारी से बिगड़ रहा माहौल

कॉलोनी में अवैध किरायेदारी का मामला भी तेजी से सामने आया है। योजना की शर्तों के अनुसार फ्लैटों को किराये पर देना प्रतिबंधित है, इसके बावजूद कई फ्लैट किरायेदारों को दे दिए गए हैं। इससे कॉलोनी का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और मूल लाभार्थियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

जिम्मेदारी से बच नहीं सकता प्राधिकरण

निवासियों का कहना है कि भले ही कॉलोनी का प्रशासनिक हस्तांतरण नगर निगम को कर दिया गया हो, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता, डिजाइन और संरचनात्मक मजबूती की जिम्मेदारी मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से समाप्त नहीं होती। निर्माण दोषों की जवाबदेही तय किया जाना आवश्यक है।