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उत्तर प्रदेश: श्रीराम कथा में खर-दूषण वध और सीता हरण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन

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उत्तर प्रदेश   Published by: Rajnesh shrivastav , उत्तर प्रदेश   Edited By: Kunal, Date: 02/07/2026 12:53:23 pm Share:
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  • 02/07/2026 12:53:23 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: हरि मंदिर मॉडल टाऊन बरेली में ब्रह्मलीन मानस रत्न  डॉ श्रीनाथ मिश्र जी के  सुपौत्र युवा ओजस्वी वक्ता पंडित श्री आशीष मिश्र वाराणसी वालो के की नौ  दिवसीय श्री राम कथा का  अष्टम आज  दिवस था।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: हरि मंदिर मॉडल टाऊन बरेली में ब्रह्मलीन मानस रत्न  डॉ श्रीनाथ मिश्र जी के  सुपौत्र युवा ओजस्वी वक्ता पंडित श्री आशीष मिश्र वाराणसी वालो के की नौ  दिवसीय श्री राम कथा का  अष्टम आज  दिवस था। मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष सुशील अरोरा व सचिव रवि छाबड़ा व अन्य सदस्यों,रमेश खनिजों,अनिता खनिजों,संजय मेहरोत्रा द्वारा महाराज जी का माल्यार्पण कर  आज की कथा की शुरुआत हुई।  संजय मेहरोत्रा वा उनके परिवार को आज कथा में मुख्य यजमान बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । वाराणसी धाम से पधारे युवा ओजस्वी वक्ता पंडित श्री आशीष मिश्र जी द्वारा अष्टम दिवस में बताया की भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी दण्डकारण्य में ऋषि-मुनियों के दर्शन करते हुए पंचवटी में रहने लगे। वहीं शूर्पणखा ने श्रीराम से विवाह का प्रस्ताव रखा, पर असफल होने पर उसने माता सीता को हानि पहुँचाने का प्रयास किया। तब लक्ष्मण जी ने उसके नाक-कान काट दिए। इसके बाद श्रीराम ने खर-दूषण और उनकी सेना का वध किया।

शूर्पणखा के कहने पर रावण ने मारीच को स्वर्णमृग बनाकर भेजा। श्रीराम के मृग के पीछे जाने और लक्ष्मण जी के कुटिया से बाहर निकलने पर रावण माता सीता का हरण कर लंका ले गया। मार्ग में जटायु ने रावण से युद्ध किया, पर वीरगति को प्राप्त हुए। बाद में श्रीराम ने जटायु को मोक्ष प्रदान किया और माता शबरी के आश्रम पहुँचकर उन्हें नवधा भक्ति का उपदेश दिया। माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम की भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से हुई। श्रीराम और सुग्रीव ने मित्रता की। श्रीराम ने बालि का वध करके सुग्रीव को किष्किन्धा का राजा बनाया। वर्षा ऋतु समाप्त होने पर सुग्रीव ने चारों दिशाओं में वानर सेनाओं को सीता जी की खोज के लिए भेजा। दक्षिण दिशा में हनुमान जी, अंगद और जाम्बवान गए। मार्ग में उन्हें सम्पाती से पता चला कि माता सीता लंका में हैं। इसके बाद हनुमान जी समुद्र पार करके लंका जाने के लिए तैयार हुए और यहीं से सुंदरकाण्ड का प्रारंभ होता है।

मन्दिर सचिव रवि छाबड़ा ने श्री हरि मंदिर प्रबंध समिति की तरफ से युवा ओजस्वी वक्ता पंडित श्री आशीष मिश्र का आनंदमयी, अमृतमयी वर्षा, ओजस्वी वाणी,धारा प्रवाहित, निर्बोध, हृदय स्पर्श,बहुत ही सुन्दर एवं सराहनीय कथा का सभी बरेली वासियों को श्रावण करा रहे है और आप सभी भक्तजनों का इस दिव्य श्री राम कथा में पधारने का आभार व्यक्त किया है। आज की कथा में सुशील अरोरा, रवि छाबड़ा,अश्विनी ओबेरॉय,संजय आनन्द, गोविन्द तनेजा,रंजन कुमार,विनोद भाटिया,मिक्की आहुजा,लुनियाल जी वा महिला मण्डल अध्यक्ष रेनू छाबड़ा अपने  महिला मण्डल की  सदस्यों के साथ उपस्थित रहे।


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