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छत्तीसगढ़: कावेरी बीज कंपनी के खिलाफ 23 अक्टूबर को रायपुर कार्यालय का घेराव करेंगे किसान, करीब 4 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: कावेरी बीज कंपनी से भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए महासमुंद, रायपुर, बेमेतरा और बलौदाबाजार जिलों के किसान 23 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित कंपनी के कार्यालय का घेराव करेंगे।
विस्तार
छत्तीसगढ़: कावेरी बीज कंपनी से भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए महासमुंद, रायपुर, बेमेतरा और बलौदाबाजार जिलों के किसान 23 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित कंपनी के कार्यालय का घेराव करेंगे। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में यह निर्णय महासमुंद के पन्नालाल टावर में आयोजित बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में शामिल किसानों का आरोप है कि कावेरी बीज कंपनी की ओर से कई किसानों और मजदूरों का अब तक भुगतान नहीं किया गया है। किसानों के अनुसार, चार जिलों के सैकड़ों किसानों और मजदूरों की करीब चार करोड़ रुपये की राशि बकाया है। भुगतान नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते अब किसान महासमुंद से रायपुर पहुंचकर कंपनी के कार्यालय का घेराव करने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि इससे पहले भी भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था। 20 फरवरी 2026 को बड़ी संख्या में किसान और मजदूर ट्रैक्टरों के साथ महासमुंद से रायपुर स्थित धनेली के प्रसंस्करण प्लांट का घेराव करने निकले थे। हालांकि, प्रशासन ने बेलसोंडा के पास किसानों को समझाइश दी और समाधान का आश्वासन देकर उन्हें वापस भेज दिया था। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही का कहना है कि प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के करीब सात महीने बाद भी किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ है और भुगतान भी नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने 8 अक्टूबर को कावेरी बीज कंपनी, रायपुर के सहायक संचालक को पत्र देकर 15 अक्टूबर तक भुगतान करने की मांग की थी। लेकिन संगठन के अनुसार, निर्धारित समय तक भुगतान को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई। भुगतान नहीं मिलने से किसानों और मजदूरों में नाराजगी बढ़ रही है। अब उन्होंने 23 अक्टूबर को कंपनी के रायपुर कार्यालय का घेराव करने का फैसला किया है। किसानों की मांग है कि उनकी बकाया राशि का जल्द भुगतान किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके। फिलहाल, कंपनी की ओर से इन आरोपों और बकाया भुगतान के संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि किसानों के प्रस्तावित आंदोलन से पहले भुगतान को लेकर कोई समाधान निकलता है या 23 अक्टूबर को घेराव किया जाएगा।
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