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बिहार: पति की दीर्घायु कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा से किया वट सावित्री पूजा

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बिहार  Published by: Sanjay Kumar Verma , बिहार  Edited By: Kunal, Date: 18/05/2026 10:30:30 am Share:
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  • Published by.: Sanjay Kumar Verma ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 18/05/2026 10:30:30 am
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संक्षेप

बिहार: पति की स्वस्थ्य काया एवं अखंड सुहाग व सुख समृद्धि की कामना को लेकर प्रखंड क्षेत्र की सुहागिन महिलाएं शनिवार की अह सुबह से क्षेत्र के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के बरगद बृक्षों की जड़ के पास बैठकर वट सावित्री की पूजा अर्चना कर ब्राह्मणों से

विस्तार

बिहार: पति की स्वस्थ्य काया एवं अखंड सुहाग व सुख समृद्धि की कामना को लेकर प्रखंड क्षेत्र की सुहागिन महिलाएं शनिवार की अह सुबह से क्षेत्र के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के बरगद बृक्षों की जड़ के पास बैठकर वट सावित्री की पूजा अर्चना कर ब्राह्मणों से कथा श्रवण किया। इस दौरान महिलाएं कच्चे धागे से बट बृक्ष की तना में फेरी बांधी। इस दौरान वारिसलीगंज नगर के थाना गेट के सामने, रेलवे रैक प्वाइंट के पास, सिमरीडीह बाईपास, उतर बाजार कोयरी टोला, माफी, सिमरी डीह मकनपुर, कुटरी, कोचगांव, अपसढ, दरियापुर, सौर ,चैनपुरा, मंजौर समेत प्रखंड के अन्य गांव स्थित बरगद वृक्ष की जड़ के पास बैठकर सुहागिन महिलाओं द्वारा पूजा अर्चना एवं फेरी लगाई गई। वट सावित्री पूजा के लिए सुबह से ही सुहागन महिलाएं पूजन सामग्री से सजी थाल लेकर बरगद पेड़ के पास जमा रही। जहां वैदिक मंत्रों उच्चारण के साथ महिलाओ ने पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र की कामना की। मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्म, विष्णु तथा शिव के अलावा माता सावित्री का निवास होता है।

 इन सभी देवताओं की एक साथ पूजा अर्चना को ले महिलाएं वटवृक्ष की पूजा करती है।देवी स्थान,उत्तर बाजार ग्रामीण ब्राह्मण राहुल पांडे का कहना है कि सुहागन महिला अपने पति के दीर्घायु जीवन को लेकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना करती है। इस दौरान ब्राह्मणों के द्वारा पतिव्रता नारी सावित्री और सत्यवान की कथा सुहागिन महिलाओं को सुनाया गया। सुहागिन महिलाएं अपने पतियों को अकाल मौत के मुंह में जाने से बचाने के लिए पूजा करती है। इस दौरान महिलाएं वटवृक्ष के जड़ के पास ताड़ के पत्तों से बने पंखा, बताशा, फल, फूल, श्रृंगार सामग्री आद से सुसज्जित पूजा की थाल पास रखकर वट पूजन करते देखी गई। इस क्रम में वट बृक्ष की परिक्रमा करते हुए कच्चे धागे को बृक्ष के जड़ में लपेटा लगाई। पूजा बाद महिलाओं को वट बृक्ष की टहनी को अपने बालों में लगा कर घर लौट पति को प्रणाम कर प्रसाद खिलाई।  महंगा बिका ताड़ के पत्ते का पंखा पूजा अर्चना के बाद सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष को अपना पति मान कर  पेड़ की जड़ में ताड़ के पत्ते से बना पंखा से हवा देती है।शनिवार को बट सावित्री पूजा रहने के कारण जो पंखा बाजार में अन्य दिन 5 रुपये में मिलता था। पर्व को लेकर 20 से 30 रुपये प्रति पंखा बिक्री हुई।