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बिहार: मिड-डे-मील में लापरवाही पर भड़के अभिभावक, DEO का सख्त रुख दोषियों पर गिरेगी गाज
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संक्षेप
बिहार: नवादा जिले के रजौली प्रखंड अंतर्गत परमेश्वर बीघा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे-मील को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। भरपूर मध्याह्न भोजन नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों छात्र-छात्राएं और अभिभावक स्कूल परिसर के
विस्तार
बिहार: नवादा जिले के रजौली प्रखंड अंतर्गत परमेश्वर बीघा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे-मील को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। भरपूर मध्याह्न भोजन नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों छात्र-छात्राएं और अभिभावक स्कूल परिसर के बाहर उतर आए और जमकर हंगामा व प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ देर के लिए विद्यालय परिसर अफरा-तफरी का केंद्र बन गया। अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को तय मानक के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा, जिससे बच्चे भूखे लौटने को मजबूर हैं। जब बच्चों ने घर जाकर इसकी जानकारी दी, तो अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और वे सीधे स्कूल पहुंच गए। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन और एमडीएम प्रभारी शिक्षक जितेंद्र कुमार पर मिड-डे-मील राशि गबन का गंभीर आरोप लगाया। ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही बच्चों के भविष्य से खुला खिलवाड़ है।
वहीं, एमडीएम प्रभारी शिक्षक जितेंद्र कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि “सरकारी प्रावधान के अनुसार बच्चों को 100 ग्राम भोजन दिया जाता है, लेकिन संसाधनों और व्यवस्था की कमी से परेशानी होती है।” हालांकि, उनकी सफाई से अभिभावक संतुष्ट नहीं दिखे। DEO का तीखा बयान — “बच्चों के हक पर डाका बर्दाश्त नहीं ::मामले ने जब तूल पकड़ा तो जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा मिड-डे-मील बच्चों का संवैधानिक अधिकार है, इसमें एक दाना की भी हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो एमडीएम प्रभारी समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई होगी। बच्चों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा।
DEO ने तत्काल जांच टीम गठित करने और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद अभिभावकों का आक्रोश कुछ शांत हुआ। फिलहाल, यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और मिड-डे-मील योजना की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि जांच के बाद दोषियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।
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