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गुजरात: अहवा सिविल अस्पताल में बायोवेस्ट निपटान पर उठे सवाल, रिहाइशी इलाके के पास कचरा दबाने के आरोप

- Photo by : social media

गुजरात  Published by: Gheesaram Fauji Choudhary , गुजरात  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 07/10/2026 05:59:27 pm Share:
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  • Published by.: Gheesaram Fauji Choudhary ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 07/10/2026 05:59:27 pm
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संक्षेप

गुजरात: डांग जिले के मुख्यालय अहवा स्थित सिविल अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट और अन्य कचरे के निपटान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल परिसर से कचरा उठाकर रिहाइशी इलाके के पास स्थित पुराने टी.बी. अस्पताल के पास गड्ढा खोदकर दबाने के आरोपों के बीच अब अस्पताल प्रशासन की आंतरिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

विस्तार

गुजरात: डांग जिले के मुख्यालय अहवा स्थित सिविल अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट और अन्य कचरे के निपटान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल परिसर से कचरा उठाकर रिहाइशी इलाके के पास स्थित पुराने टी.बी. अस्पताल के पास गड्ढा खोदकर दबाने के आरोपों के बीच अब अस्पताल प्रशासन की आंतरिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस मामले में एएचओ (AHO) भाविक पटेल से बातचीत के दौरान पूरी जिम्मेदारी अधीक्षक डॉ. मितेश कुनबी और आर.एम.ओ. डॉ. ज्योति पर डाल दिए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि, जब अस्पताल के अधीक्षक और आर.एम.ओ. से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कचरे के निपटान को लेकर कमेटी में चर्चा हुई थी, लेकिन रिहाइशी इलाके के पास गड्ढा खोदकर कचरा दबाने का कोई फैसला नहीं लिया गया था। अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया है कि एजेंसी ने अपनी मर्जी से इस जगह कचरा दबाया, जिसकी उन्हें जानकारी नहीं थी। अगर ऐसा है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान के लिए नियुक्त एजेंसी अस्पताल प्रशासन की जानकारी के बिना इस तरह का काम कैसे कर सकती है?


एजेंसी के बयान से मामला और गंभीर हुआ इस पूरी घटना में कचरा दबाने वाली एजेंसी से मिली जानकारी मामले को और गंभीर बनाती है। एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक, कहां गड्ढा खोदना है और कचरा कहां दबाना है, इसके निर्देश एएचओ भाविक पटेल की ओर से दिए गए थे।


अगर यह बात सच है तो अस्पताल के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को सूचित किए बिना रिहाइशी इलाके के पास कचरा दबाने का फैसला किसने लिया और किस नियम के आधार पर लिया, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है। क्या बायोवेस्ट को सामान्य कचरा बताने की कोशिश हुई? आरोप यह भी है कि अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को शुरुआत में सूखे-गीले कचरे के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। यदि अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही वर्गीकरण और नियमानुसार निपटान नहीं किया गया है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहद गंभीर मुद्दा बन सकता है।


खासकर रिहाइशी इलाके के पास गड्ढा खोदकर अस्पताल का कचरा दबाने से स्थानीय निवासियों की सुरक्षा, मिट्टी व पानी के प्रदूषण और संक्रमण के खतरे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अधीक्षक, आर.एम.ओ. और कमेटी सिर्फ नाम की? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अस्पताल की कमेटी में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, लेकिन कचरा दबाने का फैसला नहीं हुआ था, तो अंतिम फैसला किसने लिया? अगर एजेंसी सच में अस्पताल प्रशासन की जानकारी के बिना मनमाने ढंग से कचरा दबाकर चली गई, तो उसकी जवाबदेही तय की गई है या नहीं? और अगर एजेंसी को जगह दिखाकर कचरा दबाने का निर्देश दिया गया था, तो वह निर्देश किसका था और किस अधिकार के तहत दिया गया था? इन सवालों के स्पष्ट जवाब अब अहवा सिविल अस्पताल प्रशासन को जनता के सामने रखने होंगे। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश देखा जा रहा है। बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान जैसे संवेदनशील मामले में नियमों का पालन हुआ या नहीं, कचरे के वर्गीकरण से लेकर परिवहन और अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से की गई या नहीं, तथा रिहाइशी इलाके के पास कचरा दबाने के पीछे किसकी अनुमति या निर्देश थे—इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

साथ ही अस्पताल की आंतरिक कमेटी, अधीक्षक, आर.एम.ओ., एएचओ तथा कचरा निपटान एजेंसी की भूमिका की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। फिलहाल उपलब्ध बयानों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय पूरी घटना की आधिकारिक जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकती है। लेकिन एक बात साफ है—अहवा सिविल अस्पताल में बायोवेस्ट निपटान की पूरी व्यवस्था पर उठे सवालों के जवाब अब कागजों पर नहीं, बल्कि जांच के परिणाम के साथ जनता के सामने आने चाहिए।