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गुजरात: ट्राइबल ट्रेड फेयर 2026 में दिखेगी आदिवासी कला और संस्कृति, युवाओं को मिलेगा उद्यमिता का मंच
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संक्षेप
गुजरात: आदिवासी समुदाय और गुजरात राज्य के संयुक्त आयोजन में प्रस्तावित तीसरे नेशनल लेवल ट्राइबल ट्रेड फेयर 2026 को लेकर 26 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
विस्तार
गुजरात: आदिवासी समुदाय और गुजरात राज्य के संयुक्त आयोजन में प्रस्तावित तीसरे नेशनल लेवल ट्राइबल ट्रेड फेयर 2026 को लेकर 26 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान आयोजन की तैयारियों, उद्देश्य और प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी साझा की गई। आयोजकों के अनुसार, इससे पहले दो राष्ट्रीय स्तर के ट्राइबल ट्रेड फेयर आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि अब तीसरे संस्करण की तैयारियां की जा रही हैं। आयोजकों ने बताया कि प्रस्तावित ट्राइबल ट्रेड फेयर में 300 से अधिक कमर्शियल स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही उद्योग से जुड़े सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, ट्राइबल एग्जिबिशन और मार्गदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समुदाय के पारंपरिक उत्पादों, कला, संस्कृति और स्थानीय हुनर को व्यापक मंच देने का प्रयास किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर आयोजन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, प्लास्टिक बैग, कांच और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक अन्य सामग्री के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। लोकगीत, लोकनृत्य और आदिवासी संस्कृति से जुड़े पारंपरिक कार्यक्रमों को भी आयोजन का हिस्सा बनाया जाएगा। आयोजकों ने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि आदिवासी युवाओं को आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल है। युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि रोजगार के लिए केवल नौकरी पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। अपनी पारंपरिक कला, हुनर, स्थानीय ज्ञान और उत्पादन क्षमता के माध्यम से भी स्वरोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग पर भी फोकस ट्राइबल ट्रेड फेयर के दौरान सामाजिक और व्यावसायिक विषयों पर सेमिनार तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में केवल अच्छा उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद की गुणवत्ता के साथ बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और बाजार की समझ भी जरूरी है। इस आयोजन के जरिए आदिवासी युवाओं को परंपरा से बाजार, हुनर से विशेषज्ञता और उत्पादन से उद्यमिता तक जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही आदिवासी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और उनके लिए नए बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा।
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