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उत्तर प्रदेश: 19 दिन बाद फिर बारिश में डूबा बरेली, जलभराव ने खोली ड्रेनेज सिस्टम की पोल

- Photo by : social media

  Published by: Raju(UP) ,   Edited By: Yashoda, Date: 26/09/2026 01:49:26 pm Share:
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  • 26/09/2026 01:49:26 pm
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विस्तार

उत्तर प्रदेश: बरेली आसमान से बरसती आफत के आगे शहर का ड्रेनेज सिस्टम एक बार फिर बेबस नजर आ रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सड़कों और नालों का फर्क मिटा दिया। पॉश कॉलोनियों से लेकर निचले मोहल्लों तक पानी ही पानी नजर आ रहा है। कई जगह सड़कें तालाब बनी हैं तो आवागमन मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की तैयारियों पर है, 7 सितंबर की रिकॉर्ड बारिश से मिले सबक के बाद आखिर इन 19 दिनों में ऐसा क्या बदला कि अगली भारी बारिश में शहर फिर जलभराव से जूझने लगा बरेली अभी 7 सितंबर की रिकॉर्डतोड़ बारिश का मंजर भूला भी नहीं था। उस दौरान 24 घंटे में 381.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। यह बरेली के इतिहास की सर्वाधिक 24 घंटे की बारिश बताई गई और 2005 में दर्ज 267 मिमी का पुराना रिकॉर्ड टूट गया था। शहर के सुभाषनगर, हजियापुर, किला, शहामतगंज समेत तमाम इलाकों में सड़क और नाले का अंतर मिट गया था।

 

पॉश रेजीडेंसी गार्डेन में हालात इतने खराब हुए कि कई दिनों तक पानी नहीं निकल सका। अब शुक्रवार सुबह से फिर मौसम ने शहर की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है। लगातार बारिश के बीच जगह-जगह जलभराव ने नगर निगम की तैयारियों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं पिछली बार छह फीट पानी, ट्रैक्टर से पहुंचे थे।  डीएम और नगर आयुक्त सितंबर के पहले सप्ताह की बारिश का असर कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रेजीडेंसी गार्डेन में करीब छह फीट तक पानी भर गया था। बारिश रुकने के बाद भी तीसरे दिन पूरी तरह पानी नहीं निकल पाया।

9 सितंबर को डीएम अविनाश सिंह और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य को हालात देखने के लिए ट्रैक्टर पर बैठकर कॉलोनी के अंदर जाना पड़ा था। अधिकतर निचले इलाकों से पानी निकाला गया, लेकिन रेजीडेंसी गार्डेन समेत कुछ कॉलोनियां कई दिन तक जलभराव से जूझती रहीं। 11 सितंबर तक भी रेजीडेंसी गार्डेन में जलभराव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। यानी पिछली आफत के बाद पानी उतरने और जिंदगी पटरी पर लौटने में कई दिन लग गए थे मेयर भी उतरे थे मैदान में, फिर तलाशे जाने थे। पुराने नाले-तालाब पिछली बारिश के बाद मेयर डॉ. उमेश गौतम, नगर आयुक्त और प्रशासनिक अधिकारी भी प्रभावित इलाकों में पहुंचे थे। किला नदी का जलस्तर बढ़ने पर कर्मचारी नगर, सैदपुर हॉकिंस, लाजपत नगर, केसर वाटिका और त्रिवेणी एन्क्लेव जैसे क्षेत्रों में हालात बिगड़े थे।

 

तब नगर आयुक्त ने पुराने नालों और तालाबों को तलाशने, उन पर हुए अतिक्रमण को हटाने और पूरे शहर के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार कराने की बात कही थी। यही वजह है कि 19 दिन बाद दोबारा पैदा हुए हालात के बीच अब सवाल सिर्फ बारिश का नहीं, बल्कि उस तैयारी का भी है जो पिछली आपदा के बाद होनी थी पॉश इलाकों से निचले मोहल्लों तक पानी का कब्जा। लगातार बारिश ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सिविल लाइंस, राजेंद्रनगर, प्रेमनगर, सुभाषनगर से लेकर किला और दूसरे निचले क्षेत्रों में जलभराव लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सड़कों पर पानी जमा होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन इलाकों में है, जहां थोड़ी सी तेज बारिश के बाद नालियां और नाले ओवरफ्लो होने लगते हैं। सड़क पर जमा पानी में गड्ढे और खुले नाले दिखाई नहीं देने से हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है। 

 

पिछली बारिश ने खोल दी थी ड्रेनेज की सबसे बड़ी कमजोरी 7 सितंबर की बारिश के बाद प्रशासन की पड़ताल में समस्या का दूसरा पहलू भी सामने आया था। डीएम अविनाश सिंह के निरीक्षण में नदी की जमीन और प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्रों में हुए निर्माणों के कारण पानी का स्वाभाविक रास्ता बाधित होने की बात सामने आई। इसके बाद नदी की भूमि के सीमांकन और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। इससे साफ है कि बरेली की जलभराव समस्या केवल नाला सफाई तक सीमित नहीं है। पुराने प्राकृतिक जलमार्ग, तालाब, नदी क्षेत्र में निर्माण, अतिक्रमण और ड्रेनेज नेटवर्क सभी इस संकट से जुड़े हुए हैं चार दिन की छुट्टियां रद्द, फिर भी बारिश ने ली व्यवस्था की परीक्षा इस बार मौसम विभाग की चेतावनी पहले ही मिल चुकी थी। भारी बारिश की आशंका देखते हुए नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों की अगले चार दिनों की छुट्टियां रद्द कर दी थीं। निर्माण, जलकल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फील्ड में रहने और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से निगरानी के निर्देश भी दिए गए थे। नगर आयुक्त ने मढ़ीनाथ, सिटी रेलवे स्टेशन और बाकरगंज क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था का निरीक्षण भी किया था।

 

इसके बावजूद लगातार बारिश के बीच शहर के कई हिस्सों में जलभराव सामने आने से अब तैयारियों की असली परीक्षा शुरू हो गई है रेड अलर्ट, स्कूल-कॉलेज बंद, 27 सितंबर तक खतरा। मौसम विभाग ने 26 सितंबर के लिए बरेली में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के बरेली पूर्वानुमान में 27 सितंबर को भी भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी है। रेड वार्निंग को देखते हुए जिला प्रशासन ने 26 सितंबर को स्कूलों के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों को भी बंद रखने का आदेश दिया है। प्रशासन ने राजस्व, पुलिस, नगर निकाय, स्वास्थ्य, बिजली, सिंचाई और अन्य आपात सेवाओं को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं  19 दिन में दूसरी बड़ी परीक्षा, अब जवाब मांग रहा शहर। 7 सितंबर को रिकॉर्ड बारिश हुई तो इसे अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा माना गया। प्रशासन और नगर निगम कई दिनों तक जल निकासी में जुटे रहे। डीएम, मेयर और नगर आयुक्त प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। 


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