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मध्य प्रदेश: जिले भर में आस्था के साथ मनाई गई शब-ए-बारात, पूरी रात इबादत और दुआओं का दौर

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मध्य प्रदेश  Published by: Mujaffar Khan Shaikh , Date: 04/02/2026 10:35:40 am Share:
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  • 04/02/2026 10:35:40 am
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: शब ए बारात मनाया गया , मंगलवार को पूरे दिन बीतने के बाद शाम से अगले दिन सुबह फजर की अजान से पूर्व तक लोग अपने घरों में नियाज फातिहा करी गई  व कब्रिस्तान में जाकर अपने सगे संबंधियों के क

विस्तार

मध्य प्रदेश: शब ए बारात मनाया गया , मंगलवार को पूरे दिन बीतने के बाद शाम से अगले दिन सुबह फजर की अजान से पूर्व तक लोग अपने घरों में नियाज फातिहा करी गई  व कब्रिस्तान में जाकर अपने सगे संबंधियों के कब्र में जाकर दुआ करी। इसके लिए कब्रिस्तान में विशेष साफ सफाई कर लाइट की व्यवस्था की गई है। बता दें कि रमजान से पहले शबे बरात होती है शब ए बरात की रात में गुनाहों से तौबा की जाती है। शब-ए-बरात पर मुस्लिम समाज के लोग पूरी रात इबादत कर अपने गुनाहों की माफी खुदा से मांगते हैं। बताया जाता है कि इस रात खुदा अपने बंदों की दुआओं को कुबूल फरमाता है। मस्जिद अहले सुन्नत वल जमात जामा मस्जिद के पेश ईमाम मुफ्ती हाफिज गुलाम वारसी सहाब ने बताया कि शबे बरात की रात में इबादत

करना एवं दिन में रोजा रखना बहुत ज्यादा सवाब का काम है इस रात में सूरज डूबने के वक्त से लेकर सुबह फर्ज तक अल्लाह दुनिया में अपनी रहमत बरसाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन जो रोजा रखता है उस पर रहमतों की बारिश होती है। जानकारी के अनुसार त्योहार को लेकर पिछले सप्ताह से ही सभी लोग अपने अपने घरों में कुरान खानी मिलाद फातिहा आदि करने में लगे हुए थे। मंगलवार की रात को पूरी रात
जागकर सभी लोगो ने नमाज़ अदा की इबादत करी और अपने गुनाहों के लिए माफी मांगी महिलाएं घरों में और पुरुषों ने मस्जिद में जाकर इबादत की नमाज अदा की तथा दुआ मांगी। जिले भर में आज धूमधाम के साथ शब-ए-बारात का त्योहार मनाया गया । त्योहार को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई थी। शब-ए-बारात में रात भर अल्लाह की इबादत की जाती है। 

कुरान शरीफ की तिलावत की जाती है। इस रात को पुराने दिनों को भुलाकर फिर से नए तरीके से चलने की दुआ मांगी जाती है। पिछले दिनों में हुई गलतियों, गुनाहों की माफी मांग कर नए तरीके से चलने की दुआ मांगी  जाती है। इस रात को कब्रिस्तान में भी जाकर मरहूमो (मृतकों) के लिए दुआ की जाती है। बताया जाता है कि शब-ए-बारात की रात को मरहूम (मृतक) भी अपने घर के लोगों से उम्मीद करते हैं कि उनके घर के लोग उनके लिए क्या करते हैं। इसलिए रात 10बजे के बाद कब्रिस्तान में जाकर मरहूमो के हक में ओर मरहूमो की मगफिरत (जन्नत में आला मुकाम के लिए अल्लाह से दुआ मांगी।