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 मध्य प्रदेश: शिक्षक दिवस पर काली पट्टी बांधकर शिक्षकोंने किया विरोध, TET और ई-अटेंडेंस के खिलाफ शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने खोला मोर्चा

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मध्य प्रदेश  Published by: Riyaz Mohammad Khan , मध्य प्रदेश  Edited By: Shikha Pandey, Date: 05/09/2026 05:51:06 pm Share:
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  • Published by.: Riyaz Mohammad Khan ,
  • Edited By.: Shikha Pandey,
  • Date:
  • 05/09/2026 05:51:06 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: झाबुआ शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रांतीय शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता और ई-अटेंडेंस प्रणाली के खिलाफ विरोध जताया।

विस्तार

मध्य प्रदेश: झाबुआ शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रांतीय शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता और ई-अटेंडेंस प्रणाली के खिलाफ विरोध जताया। शिक्षकों ने अपने कर्तव्य स्थल पर काम करते हुए मौन प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर दोबारा पात्रता परीक्षा का नियम लागू करना उनके साथ अन्याय है। शिक्षक संगठनों के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। शिक्षकों का तर्क है कि वे पिछले 15 से 30 वर्षों से शासकीय सेवा में कार्यरत हैं और अपनी नियुक्ति के समय लागू नियमों एवं प्रक्रिया के तहत ही सेवा में आए थे। ऐसे में अब इतने वर्षों बाद TET परीक्षा अनिवार्य किए जाने को शिक्षक संगठन अव्यावहारिक और अतार्किक बता रहे हैं। संयुक्त मोर्चा ने TET को लेकर पूर्वव्यापी नियम लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) वर्ष 2010 में लागू हुआ और TET की अनिवार्यता वर्ष 2011 से प्रभावी हुई। ऐसे में 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू व्यवस्था को लागू करने का विरोध किया जा रहा है।

शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस श्रेणी और किस वर्ष नियुक्त शिक्षकों के लिए TET का फॉर्म भरना अनिवार्य है। मोर्चे ने सरकार से मांग की है कि पहले पूरी नीति स्पष्ट की जाए और जिन शिक्षकों को परीक्षा के लिए आवेदन करना है, उनकी नामवार सूची जारी की जाए। विरोध के बीच परीक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जाने की बात भी सामने आई है। शिक्षक संगठनों के अनुसार पहले परीक्षा केवल ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तावित थी, लेकिन अब ऑफलाइन ओएमआर शीट के माध्यम से परीक्षा देने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। संगठन इसे अपने आंदोलन के दबाव का परिणाम बता रहा है। मध्य प्रदेश में शिक्षक संगठनों ने TET फॉर्म नहीं भरने की अपील भी की थी। संगठन के दावे के मुताबिक प्रदेश में करीब 1.5 लाख शिक्षकों में से 4 सितंबर तक लगभग ढाई हजार आवेदन ही जमा हुए। कम आवेदन के बाद आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने की बात कही गई है। वहीं, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले विभिन्न राज्यों के शिक्षक दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक पुराने और अनुभवी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षकों ने शिक्षक दिवस पर काली पट्टी बांधकर सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। अब शिक्षक संगठनों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है।