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राजस्थान: नागौर में बाजरे की फसल में पत्ती धब्बा रोग के लक्षण, कृषि अधिकारियों ने किसानों को दिए बचाव के सुझाव

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राजस्थान  Published by: Manoj Kumar Chordiya , राजस्थान  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 08/08/2026 11:58:29 am Share:
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  • Published by.: Manoj Kumar Chordiya ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 08/08/2026 11:58:29 am
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संक्षेप

राजस्थान: किसानों की फसलों को रोगों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार सक्रिय प्रयास किए जा रहे है। इसी क्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को डेगाना तहसील के खैरवा ग्राम का दौरा कर बाजरे की खड़ी फसल का गहन निरीक्षण किया।

विस्तार

राजस्थान: किसानों की फसलों को रोगों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार सक्रिय प्रयास किए जा रहे है। इसी क्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को डेगाना तहसील के खैरवा ग्राम का दौरा कर बाजरे की खड़ी फसल का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई खेतों में पत्ती धब्बा (लीफ स्पॉट) रोग के शुरुआती लक्षण पाए गए। इस पर उन्होंने किसानों को मौके पर ही वैज्ञानिक तरीके से रोग की पहचान, बचाव एवं नियंत्रण की विस्तृत जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सहायक निदेशक शंकरराम सियाक ने बताया कि पत्ती धब्बा रोग की अनदेखी करने पर यह तेजी से फैल सकता है, जिससे पत्तियों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता कम हो जाती है और अंततः फसल की उपज एवं गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि फसल का नियमित निरीक्षण करें तथा रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं।

सियाक ने किसानों को सलाह दी कि मैनकोजेब 75 प्रतिशत WP @ 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत EC @ 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। यदि रोग का प्रकोप अधिक हो तो एजॉक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत + डाइफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत SC @ 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव प्रभावी रहेगा। उन्होंने छिड़काव सुबह या शाम के समय करने तथा आवश्यकता पड़ने पर 10–15 दिन बाद पुनः छिड़काव करने की सलाह दी। सहायक निदेशक सियाक ने कहा कि समय पर रोग की पहचान और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार किया गया उपचार किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकता है। कृषि विभाग किसानों के खेत तक पहुंचकर तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसान किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर तुरंत निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क करें, ताकि समय रहते प्रभावी नियंत्रण बताने से किसान इसका प्रभावी उपचार कर सके।