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उत्तर प्रदेश: सिद्धार्थनगर फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप, SSP से की शिकायत

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उत्तर प्रदेश  Published by: Prvin Kumar , Date: 19/03/2026 10:07:37 am Share:
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  • 19/03/2026 10:07:37 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: मालीमैनहा निवासी अब्दुल मोईद ने 18 मार्च, बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक महाजन से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुनियोजित तरीके से एक फर्जी आपराधिक मामले में फंसाया जा रहा है। मो

विस्तार

उत्तर प्रदेश: मालीमैनहा निवासी अब्दुल मोईद ने 18 मार्च, बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक महाजन से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुनियोजित तरीके से एक फर्जी आपराधिक मामले में फंसाया जा रहा है। मोईद के अनुसार, ग्राम बंजरहवा के गाटा संख्या 372 को वर्ष 2012 में नूरूल हसन ने असलम के नाम बैनामा कर दिया था। इससे नूरूल हसन का उस जमीन पर कोई अधिकार नहीं बचा था। इसके बावजूद, आरोप है कि वर्ष 2019 में उसी जमीन का दोबारा बैनामा अफशा खातून के नाम किया गया। उपजिलाधिकारी डुमरियागंज की 7 दिसंबर 2021 की रिपोर्ट में इस दूसरे बैनामे को फर्जी बताया गया है। अब्दुल मोईद ने आरोप लगाया कि मूल विवाद गाटा संख्या 372 से जुड़ा होने के बावजूद, पुलिस विवेचना को मोड़ते हुए गाटा संख्या 380 को शामिल कर लिया गया। उनका कहना है कि वे गाटा संख्या 380 पर पिछले करीब 10 वर्षों से काबिज होकर खेती कर रहे हैं, 

और इस भूमि से विपक्षी पक्ष का कोई संबंध नहीं है। मोईद ने यह भी बताया कि गाटा संख्या 380 को लेकर किसी प्रकार का कोई करारनामा या भुगतान संबंधी साक्ष्य भी मौजूद नहीं है। प्रार्थी के मुताबिक, जब वादी पक्ष अपने आरोपों को साबित नहीं कर सका, तो पुलिस पर दबाव बनाकर कथित रूप से एक नई कहानी तैयार कराई गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो कोई मारपीट हुई और न ही गाली-गलौज की घटना। उनका दावा है कि यह मुकदमा केवल उन्हें डराने और जमीन पर नाजायज कब्जा करने की नीयत से दर्ज कराया गया है। उन्होंने थाना डुमरियागंज पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच न होने का आरोप लगाया। मोईद ने पूरे मामले की पुनर्विवेचना किसी अन्य अधिकारी से कराने की मांग की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने बताया कि 18 मार्च को प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच एडिशनल एसपी प्रशांत कुमार को सौंप दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और सामने आए तथ्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।