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उत्तर प्रदेश: दरगाहों में डीजे और आतिशबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर 50 हजार रुपये जुर्माना
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: दरगाहों की पाकीज़गी, अदब और रूहानी माहौल को बनाए रखने के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया गया है। दरगाह आला हजरत से जुड़े प्रमुख संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफा की पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य की सभी दरगाहों में डीजे बजाने और आतिशबाजी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: दरगाहों की पाकीज़गी, अदब और रूहानी माहौल को बनाए रखने के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया गया है। दरगाह आला हजरत से जुड़े प्रमुख संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफा की पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य की सभी दरगाहों में डीजे बजाने और आतिशबाजी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाएगा। जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान की पहल पर यह निर्णय लिया गया है। जारी आदेश के अनुसार दरगाह परिसरों और उनके आसपास किसी भी प्रकार का डीजे साउंड सिस्टम, तेज ध्वनि विस्तारक यंत्र और आतिशबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। उर्स में बदलेंगे नियम, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी दरगाह कमेटी, आयोजक या व्यक्ति द्वारा आदेश का उल्लंघन किया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही संबंधित आयोजन समिति की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। ‘दरगाह इबादत की जगह, मनोरंजन का मंच नहीं’ फरमान हसन खान ने कहा कि दरगाहें अकीदतमंदों के लिए रूहानी सुकून और इबादत का केंद्र होती हैं। उर्स और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान डीजे और आतिशबाजी के बढ़ते चलन से दरगाहों की गरिमा प्रभावित हो रही थी। कई स्थानों पर अत्यधिक शोर के कारण इबादत और दुआओं का माहौल भी प्रभावित होता है। इसी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। बरेली से उठी पहल, देशभर में हो सकती है चर्चा सुन्नी मुसलमानों के प्रमुख मरकज दरगाह आला हजरत, बरेली से जुड़ी इस पहल को धार्मिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में लागू किए गए इस फैसले की चर्चा अब अन्य राज्यों तक भी पहुंचेगी और कई दरगाहें इसी तरह के नियम लागू करने पर विचार कर सकती हैं। धार्मिक संगठनों का कहना है कि दरगाहों में शांति, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखना सभी अकीदतमंदों की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है, ताकि धार्मिक स्थलों की मूल पहचान और गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
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