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उत्तराखंड: विष्णु लोक कॉलोनी में मकर संक्रांति उत्सव: सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का संदेश
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संक्षेप
उत्तराखंड: विश्व हिंदू परिषद के सेवा विभाग द्वारा विष्णु लोक कॉलोनी में आयोजित मकर संक्रांति उत्सव ने समाज में सेवा, संस्कार और समरसता की सशक्त मिसाल प्रस्तुत की। यह आयोजन परम पूजनीय सहजानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर तथा परम पूजनीय शि
विस्तार
उत्तराखंड: विश्व हिंदू परिषद के सेवा विभाग द्वारा विष्णु लोक कॉलोनी में आयोजित मकर संक्रांति उत्सव ने समाज में सेवा, संस्कार और समरसता की सशक्त मिसाल प्रस्तुत की। यह आयोजन परम पूजनीय सहजानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर तथा परम पूजनीय शिवम महंत जी गुरु रामदास जी महाराज के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रांत संगठन मंत्री अजय जी का ओजस्वी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिसने उपस्थित जनसमुदाय को सेवा कार्यों के प्रति प्रेरित किया। संस्कारशालाओं की प्रस्तुतियाँ बनीं मुख्य आकर्षण संस्कारशाला की आचार्य बहनों के मार्गदर्शन में बच्चों ने देशभक्ति और भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। प्रमुख प्रस्तुतियों में सरस्वती वंदना: रामकृष्ण संस्कारशाला (कविता श्रीवास्तव) सेवा और श्रम का सम्मान कार्यक्रम में शिवालिक नगर से सुनिधि (शिक्षिका) सहित काजल, राधिका, डॉली, शशि वाला, जानवी को सम्मानित किया गया। साथ ही समाज के लघु उद्यमियों व श्रमिक बंधुओं—नाई, धोबी, मोची, बढ़ई, वेल्डर, स्कूटर/मोटरसाइकिल मैकेनिक, हलवाई आदि—का सम्मान कर श्रम की गरिमा को रेखांकित किया गया। यह संदेश स्पष्ट था कि समाज का हर कर्मयोगी सम्मान का अधिकारी है। व्यापक सहभागिता कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष बलराम कपूर, जिला मंत्री जिवेंद्र तोमर, सह जिला मंत्री दीपक तालियान, विभाग संगठन मंत्री अर्जुन, बजरंग दल से अमित मुल्तानिया, दिग्विजय सिंह, हिमांशु विद्यार्थी, अरुण गुप्ता, रवि जोशी सौरभ सक्सेना जी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता, संस्कारशाला संचालन टोली, प्रांत व जिला स्तर के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। विष्णु लोक कॉलोनी का यह मकर संक्रांति उत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी संदेश था—जहाँ सेवा, संस्कार और समरसता ने मिलकर एक सशक्त भारत की झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का सफल संचालन चंद्रकांता एवं बबीता ने किया। संस्कारशालाओं के समन्वय की जिम्मेदारी सुधा टोंक और मंजू नौटियाल ने निभाई। संयोजक विकास राजपूत ने सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया, जबकि सर्वव्यवस्था प्रमुख सुनील पांडे जी ने अपनी टीम—संजय कश्यप, संजय पाल, संजय धनगर—के साथ उत्कृष्ट प्रबंधन प्रस्तुत किया।
देश रंगीला: विश्वकर्मा संस्कारशाला (खुशी) संस्कृत लोकगीत: सिद्धिविनायक बाल संस्कारशाला (पिंकी) देश है वीर जवानों का: दक्षेश्वर संस्कारशाला (याचना)
महाभारत पर नृत्य, कबीर के दोहे: बंकिमचंद्र चटर्जी संस्कारशाला (मीरा राय)
तेरी माटी की कसम: श्री गुरु जी संस्कारशाला (मनीषा पांडे) जलवा तेरा जलवा: श्री राम संस्कारशाला (किरण) स्वच्छता पर नाटक, भारत का बच्चा-बच्चा, पहाड़े: चंडी देवी संस्कारशाला (सोनी) नन्हे नन्हे घुंघरू: मां शबरी संस्कारशाला (रेखा)
गढ़वाली लोकनृत्य: मां गंगा संस्कारशाला (तान्या) आत्मरक्षा प्रदर्शन: बच्चों द्वारा प्रभावशाली प्रस्तुति।
सेवा का दर्शन: समाज परिवर्तन की दिशा अपने संक्षिप्त उद्बोधन में प्रांत संगठन मंत्री ने कहा कि सेवा कार्य सर्वोच्च साधना है; सेवा करने वाला व्यक्ति ईश्वर के निकट होता है। उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद का सेवा कार्य छुआछूत मिटाने, भूख दूर करने और समाज को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। संस्कारशालाओं के माध्यम से बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का बीजारोपण किया जा रहा है—ताकि वे आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बनें।
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