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मध्य प्रदेश: पोरसा में गूंजा भक्ति का स्वर, BJP जीत की खुशी और विश्व शांति के लिए संगीतमय सुंदरकांड पाठ
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा…” की चौपाइयों के साथ पूरा शहर आज भक्ति रस में डूबा नजर आया। हनुमान जी की कृपा प्राप्ति और विश्व शांति की कामना को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया गया।
विस्तार
मध्य प्रदेश: संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा की चौपाइयों के साथ पूरा शहर आज भक्ति रस में डूबा नजर आया। हनुमान जी की कृपा प्राप्ति और विश्व शांति की कामना को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया गया। कलयुग में संकटों से मुक्ति दिलाने वाले पवनसुत हनुमान जी की महिमा का गुणगान करते हुए श्रद्धालुओं ने एक स्वर में भजन-कीर्तन और चौपाइयों का पाठ किया। मान्यता है कि सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करने मात्र से भय, रोग, दुख और संकट दूर हो जाते हैं। भगवान श्री गोवर्धन गिरिराज जी महाराज मंदिर में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर, गायत्री मंदिर, गणेश मंदिर तथा रेस्ट हाउस मंदिर सहित अनेक धार्मिक स्थलों पर यह आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। भगवान गोवर्धन गिरिराज जी महाराज मंदिर में महंत रामकिशोर दास महाराज के मार्गदर्शन में भारतीय जनता पार्टी की तीन राज्यों में विजय श्री होने की खुशी में सुंदरकांड का आयोजन किया गया, जिसमें रामनिवास उपाध्याय ,, डॉक्टर सुरेंद्र सिंह तोमर, जगत नारायण शर्मा,पप्पू सिंह तोमर, रामदत्त गुप्ता,ब्रजराज सिंह तोमर,रमेश सिंह तोमर ,राधाकृष्ण गुप्ता, मुरारी लाल गुप्ता, उर्मिला देवी शर्मा ,मुन्नी तोमर, जसवीर सिंह तोमर,संतोष वर्मा,सहित करीब एक सैकड़ा से अधिक भक्त शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान से प्रार्थना की कि पूरे विश्व में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे। भजन, ढोलक और झांझ की धुनों पर गूंजते “जय श्री राम” और “बजरंग बली की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। हनुमान जी की महिमा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी अष्ट सिद्धियों और नव निधियों के दाता माने जाते हैं। वे भक्तों के कष्ट हरने वाले, बल-बुद्धि और विद्या प्रदान करने वाले देवता हैं। हनुमान चालीसा में वर्णित है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन के संकट स्वतः दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। यही कारण है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार और समाज की सुख-शांति के लिए इस पाठ का आयोजन करते हैं। पोरसा में हुए इस भव्य धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था और भक्ति के माध्यम से समाज में एकता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है।
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