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मध्य प्रदेश: राम की सहनशीलता ने बनाया विश्वपूज्य, बच्चों को दें धर्म के संस्कार: चंद्रेशमुनिजी
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: कर्मो से मुक्त होने की इच्छा, भव परंपरा से मुक्त होने की इच्छा और मोहरूपी कर्म बंध के कारणों से मुक्त होने की इच्छा ही संवेग का स्वरूप है। जीव में चक्षु- अचक्षु दर्शन व मन के सहारें ज्ञान के माध्यम से धर्म के इस सही स्वरुप को समझा जा सकता सकता है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: कर्मो से मुक्त होने की इच्छा, भव परंपरा से मुक्त होने की इच्छा और मोहरूपी कर्म बंध के कारणों से मुक्त होने की इच्छा ही संवेग का स्वरूप है। जीव में चक्षु- अचक्षु दर्शन व मन के सहारें ज्ञान के माध्यम से धर्म के इस सही स्वरुप को समझा जा सकता सकता है। उक्त धर्म संदेश विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी ने कहे। पूज्य श्री ने सभा से पूछा कि यदि खाना खाते समय दांत से जीबान कट जाए तो आप जीबान को निकालोगे या दांत को ...? वास्तव में जीव अनादि से यही करता आ रहा है वह बाहरी तत्व को पकड़ कर आत्म तत्व से दूर होता जा रहा है। दांत व जिबान निकालना बुद्धिमानी नही है वास्तव में तो विवेक से ही जीबान कटने से बचा जा सकता है। आपने राम - रावण के दृष्टांत के माध्यम से कहा कि राम की सहनशीलता व क्षमा गुण के कारण उन्हें जगत पूज्य बनाया जबकि रावण के अभिमान ने उन्हें नरक गति का मेहमान बनाया। श्रीराम की गुणदृष्टि से ही लक्ष्मण को रावण से भी हित शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। ऐसे में रावण ने भी अपने पतन का कारण बताते हुए जो हित शिक्षा दी वो सबके लिए प्रेरणा दायक है। पूज्यश्री ने रावण की शिक्षाओं को बताते हुए कहा कि मन में अशुभ विचार आने पर कल्याण मित्र रूपी गुरु से सलाह जरूर ले, दूसरी शिक्षा में बताया कि यदि कोई सलाह दे तो उस पर आवेश नही करें व तीसरी शिक्षा में बताया कि शुभ विचार आने पर उसे तुरंत अमल में लाये। यदि आप रावण के पतन को देखोगें तो आपको पता चलेगा कि रावण ने सीता के अपहरण के कुविचार पर गुरु से सलाह नही ली, विभीषण ने उसे सलाह देनी चाही तो उस पर आवेश किया और मंदोदरी के कहने पर सीता लौटाने के शुभ विचार आने पर भी उसे अमल में नही लाया जिससे उसका पतन हुआ। आपने कहा कि यदि जीव को संवेग की तीव्र रुचि उत्पन्न हो जाती है तो वह संसार विस्तार का घटाने का प्रयास करता है यही धर्म क्रिया है। धर्मसभा को थांदला गौरव पूज्य श्री जिनांशमुनिजी ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान ने जीव के स्वभाव व विभाव दशा दोनों को ही बताया है परंतु संसारी जीव संसार के कार्यों को ही अपना स्वभाव मान उसी के लिये पुरुषार्थ कर रहा है। आगम का आलम्बन लेते हुए आपने कहा कि अनादि से यह जीवन असंस्कृत है यहाँ आयुष्य रूपी डोर एक बार टूटने के बाद फिर नहीं जुड़ती। पत्नी परिवार रिश्ते नातें कोई भी आयुष्य डोर बढ़ाने में समर्थ नहीं है इसलिए जीवन को संस्कारित करों। आपने वर्तमान समय में संस्कार विहीन संतानों के लिए जिम्मेदार माता-पिता से कहा कि यदि आपके पूर्वजों के दिये संस्कार आप अपने बच्चों को नही दोगे तो जैन दर्शन के सिद्धांतों का ह्रास तो होगा ही आपकी संतान असंस्कारी होकर स्व-पर दुःख का कारण बन जाएगी। मोबाइल के दुष्परिणाम बताते पूज्य श्री ने कहा कि वर्तमान समय में तो मात्र 5-6 महीने के छोटे से बच्चें को भी मोबाइल दे दिया जाता है फिर वह थोड़ा बड़ा होता है तो उसका आदि बन जाता है। आपने कहा कि आजकल बच्चें सही गलत को समझते नही है फिर माता-पिता के साथ एक ही छत के नीचे रहने वालें बच्चें भी गलत तरीके की वेब सीरीज देख कर बिगड़ जाते है और घर पर ही जमेटो जैसी कम्पनियों से सीधा नानवेज ऑर्डर कर मांस भक्षी बन जाते है। आपने कहा संतों को मांस भक्षी घरों से गोचरी लेना नही कल्पता ऐसे में संत चर्या कैसे सुरक्षित रहेगी यह भी विचार करना चाहिए। आपने कहा कि यह मोबाइल वृत्ति जीव को स्वच्छंदी बनाती है जिसके चलते वह आगे चलकर अपने माता-पिता व बड़ो का अपमान करने से भी नही चुकता है अतः समय रहते अपने बच्चों को एक मात्र धर्म की शरण देकर उसे संस्कारित करना हर माता-पिता का कर्तव्य है। धर्मसभा का संचालन संघ सचिव हितेश शाहजी ने करते हुए गुरु भगवन्तों के विहार आदि विभिन्न जानकारियां साझा की। जलगाँव निवासी भंडारी परिवार ने करवाये वर्षितप के पारणें संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने बताया कि थांदला में चल रहे 90 सामुहिक वर्षितप आराधकों के सामूहिक पारणें संघ व्यवस्था के अनुसार जलगाँव (महाराष्ट्र) निवासी प्रेमकुमारी सुजानमल भंडारी परिवार ने करवाये। इस अवसर पर थांदला जिनालय जीर्णोद्धार कर्ता मोहनखेड़ा तीर्थ प्रणेता श्रीमद्विजय पूज्य श्री ऋषभविजयजी के सुशिष्य वर्षितप आराधक पूज्य श्री पियुषविजयजी म.सा. ने वर्षितप आराधना स्थल पर पहुँच कर सभी को मांगलिक श्रवण करवाई वही नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप के पश्चात तपस्वियों ने पारणा किया। इस अवसर पर लाभार्थी परिवार से थांदला संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक तलेरा, कमलेश तलेरा व पारस तलेरा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
