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उत्तर प्रदेश: ग्रेटर नोएडा में नवजात के इलाज में लापरवाही का आरोप, परिजनों ने अस्पताल व अधिकारियों पर साधी चुप्पी पर उठाए सवाल
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: नवजात शिशु के इलाज में कथित गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने परिजनों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है। बार-बार लीगल नोटिस भेजने के बावजूद, अस्पताल
विस्तार
उत्तर प्रदेश: नवजात शिशु के इलाज में कथित गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने परिजनों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है। बार-बार लीगल नोटिस भेजने के बावजूद, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारी जैसे CMO अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। अस्पताल में हुई कथित चूक परिवार का आरोप परिजनों ने कहा कि उन्होंने कई बार अस्पताल प्रबंधन को लीगल नोटिस भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके अलावा, मांगे जाने पर भी अनिवार्य मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। परिवार का कहना है कि अस्पताल और संबंधित अधिकारी लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। हमारे बेटे के साथ हुई इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों को सजा मिलनी चाहिए। अस्पताल और अधिकारियों का यह रवैया स्वीकार्य नहीं है,” परिवार ने कहा। शिकायत और प्रशासन की प्रतिक्रिया परिवार ने इस मामले में CMO, DM और अन्य उच्च अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परेशान माता-पिता ने IGRS (जनसुनवाई) के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई है। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि IV Extravasation नवजात शिशुओं के लिए बहुत गंभीर स्थिति है, जिसमें दवा या फ्लूइड नस से बाहर जाकर आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है। नवजात शिशु ऐसे मामलों में अत्यंत संवेदनशील होते हैं और समय पर उचित उपचार न मिलने पर स्थायी न्यूरोलॉजिकल नुकसान या Cerebral Palsy जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं।
परिजनों का आरोप है कि NIMMS Hospital के NICU में नवजात शिशु के इलाज के दौरान IV Extravasation हुआ, जिसके कारण बच्चे के दोनों हाथों पर Gangrenous patches और Bed sore जैसे गंभीर घाव उत्पन्न हो गए। इसके अलावा, ऑक्सीजन और अन्य उपचार प्रबंधन में कथित लापरवाही के चलते बच्चे को स्थायी ब्रेन डैमेज हुआ। चिकित्सकों ने बच्चे को Cerebral Palsy बताया है। वर्तमान में बच्चा AIIMS और अन्य 4-5 विभागों में दीर्घकालीन उपचाराधीन है।
“नवजात बच्चों में इलाज में कोई भी चूक स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में अस्पतालों को जवाबदेह ठहराना बेहद जरूरी है,” एक वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया। परिवार न्याय की उम्मीद में लगातार संघर्ष कर रहा है। यह मामला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि नवजात शिशुओं के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
परिवार ने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।
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