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उत्तर प्रदेश: नूरपुर में ‘मिशन 2027’ को लेकर सक्रिय हुए गजेंद्र हरी प्रताप सिंह ‘धनगर’, धनगर समाज को साधने की तेज़ हुई कवायद

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उत्तर प्रदेश  Published by: Kanta Kumar , Date: 19/02/2026 02:24:53 pm Share:
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  • 19/02/2026 02:24:53 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो रही है, नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक नया और ऊर्जावान चेहरा तेजी से उभर कर सामने आ रहा है। राष्ट्रीय समाज

विस्तार

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो रही है, नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक नया और ऊर्जावान चेहरा तेजी से उभर कर सामने आ रहा है। राष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) के बिजनौर जिला अध्यक्ष गजेंद्र हरी प्रताप सिंह 'धनगर' ने क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाकर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। धनगर समाज के लिए 'उभरता चेहरा'
पिछले लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे धनगर समाज के लिए गजेंद्र हरी प्रताप सिंह एक मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। समाज के हक की लड़ाई हो या युवाओं को एकजुट करने का मिशन, गजेंद्र ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनकी सरल कार्यशैली और समाज के प्रति समर्पण उन्हें आगामी चुनाव में एक मजबूत दावेदार बनाकर 

नूरपुर विधानसभा में परिवर्तन की बयार, गजेंद्र हरी प्रताप सिंह 'धनगर' बने 'मिशन 2027' का मुख्य चेहरा बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नूरपुर विधानसभा हमेशा से एक महत्वपूर्ण केंद्र रही है। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यहाँ के सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) के जिला अध्यक्ष गजेंद्र हरी प्रताप सिंह 'धनगर' की बढ़ती सक्रियता ने न केवल अन्य दलों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि धनगर समाज और पिछड़ा वर्ग के भीतर एक नई राजनीतिक चेतना पैदा कर दी है। धनगर समाज की उपेक्षा और 'नया विकल्प'
लंबे समय से नूरपुर क्षेत्र का धनगर समाज अपनी राजनैतिक हिस्सेदारी की बाट जोह रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े दल वोट तो लेते हैं, लेकिन विकास और प्रतिनिधित्व के मामले में समाज को हाशिए पर धकेल दिया जाता है। ऐसे में गजेंद्र हरी प्रताप सिंह 'धनगर' एक 'मसीहा' और 'मजबूत विकल्प' के रूप में उभरे हैं। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर समाज को एकजुट करने का जो बीड़ा उठाया है, उसका असर अब धरातल पर दिखने लगा है।

जमीनी संघर्ष और जनता से जुड़ाव गजेंद्र सिंह केवल पद के आकांक्षी नहीं, बल्कि एक जमीनी संघर्ष के साथी माने जाते हैं। जिला अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बिजनौर में पार्टी के संगठन को ब्लॉक और बूथ स्तर तक मजबूत किया है। किसानों के मुद्दे: गन्ना भुगतान से लेकर आवारा पशुओं की समस्या तक, गजेंद्र ने प्रशासन के सामने पुरजोर तरीके से आवाज उठाई है। युवा रोजगार: क्षेत्र के युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी को वे अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। सामाजिक सुरक्षा: दलित, पिछड़ा और वंचित वर्ग को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए वे लगातार शिविर और जनसंपर्क कर रहे हैं। नूरपुर का भविष्य: गजेंद्र सिंह का विजन जब उनसे 2027 की तैयारियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन है।

"नूरपुर की जनता अब जाति-धर्म के खोखले वादों से ऊपर उठकर विकास और मान-सम्मान की राजनीति चाहती है। मेरा संकल्प है कि नूरपुर विधानसभा का हर गाँव पक्की सड़कों, बेहतर स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस हो। धनगर समाज की जो पहचान और हक दबाया गया है, उसे हम लखनऊ की विधानसभा तक लेकर जाएंगे।"
— गजेंद्र हरी प्रताप सिंह 'धनगर' (जिला अध्यक्ष, RSP)

2027 का रण: चुनौतीपूर्ण लेकिन तय!
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि धनगर समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग एकजुट होकर गजेंद्र सिंह के साथ खड़ा होता है, तो नूरपुर में पारंपरिक दलों का किला ढह सकता है। युवाओं में उनकी 'क्लीन इमेज' और सरल स्वभाव उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराते हुए, गजेंद्र सिंह अब नूरपुर की गलियों में बदलाव की नई इबारत लिख रहे हैं। 'न्यूज पेपर' की इस विशेष रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दिनों में उनकी जनसभाएं विरोधियों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली हैं।

नूरपुर की सियासत में 'धनगर' शक्ति का उदय: गजेंद्र हरी प्रताप सिंह ने फूंका 2027 का चुनावी दंगल  

उत्तर प्रदेश की राजनीति का राजा किस करवट बैठेगा, यह तय करने में पश्चिमी यूपी की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। इसी क्रम में जनपद बिजनौर की नूरपुर विधानसभा इस समय चर्चाओं के केंद्र में है। चर्चा का मुख्य कारण हैं— राष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) के जिला अध्यक्ष गजेंद्र हरी प्रताप सिंह 'धनगर'।

2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर भले हों, लेकिन गजेंद्र सिंह ने जमीनी स्तर पर जो चक्रव्यूह रचा है, उसने स्थापित राजनीतिक घरानों की नींद उड़ा दी है। धनगर समाज के 'उभरते चेहरे' के रूप में उनकी पहचान अब केवल एक जाति विशेष तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे नूरपुर के 'जननायक' बनने की ओर अग्रसर हैं।

सामाजिक चेतना का नया अध्याय: 'हक की लड़ाई, अब आर-पार'
नूरपुर क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से किसान राजनीति का गढ़ रहा है, लेकिन यहाँ का धनगर समाज लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रहा है। गजेंद्र हरी प्रताप सिंह ने इस रिक्त स्थान को भरने का काम किया है। उन्होंने 'गाँव-गाँव, पाँव-पाँव' अभियान के जरिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनी पहुँच बनाई है। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक समाज का अपना प्रतिनिधि सदन में नहीं बैठेगा, तब तक विकास की नीतियां कागजों तक ही सीमित रहेंगी।

युवाओं के 'आइकन' और संघर्षशील व्यक्तित्व
गजेंद्र सिंह की सबसे बड़ी ताकत क्षेत्र का युवा वर्ग है। बेरोजगारी और स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा के अभाव को लेकर वे लगातार सरकार और प्रशासन को घेरते रहे हैं। उनकी कार्यशैली में एक खास बात यह है कि वे केवल समस्याओं को गिनाते नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए अधिकारियों की चौखट पर डटे रहते हैं। उनकी 'क्लीन इमेज' और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना रहा है।