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बिहार: चकिया तिरंगा यात्रा में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर सवाल, विधायक ने शिकायत की चेतावनी

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बिहार  Published by: Dinesh Kumar Gupta , बिहार  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 13/08/2026 02:44:07 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 13/08/2026 02:44:07 pm
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संक्षेप

बिहार: पूर्वी चंपारण के चकिया में पिपरा विधायक श्यामबाबू यादव के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली गई। प्रखंड कार्यालय परिसर से शुरू हुई यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए केसरिया रोड स्थित बाजार समिति पहुंचकर समाप्त हुई।

विस्तार

बिहार: पूर्वी चंपारण के चकिया में पिपरा विधायक श्यामबाबू यादव के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली गई। प्रखंड कार्यालय परिसर से शुरू हुई यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए केसरिया रोड स्थित बाजार समिति पहुंचकर समाप्त हुई। यात्रा में स्कूली बच्चों और आम लोगों की बड़ी भागीदारी रही। हाथों में तिरंगा और देशभक्ति के नारों के बीच निकली इस यात्रा ने माहौल को देशभक्तिमय बना दिया। लेकिन तिरंगा यात्रा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की कथित गैरमौजूदगी को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक श्यामबाबू यादव ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की शिकायत करने की बात कही है।

बताया जा रहा है कि यात्रा की शुरुआत के दौरान चकिया के कुछ अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे, लेकिन आरोप है कि कई अधिकारी कुछ देर रुकने और फोटो सेशन के बाद वहां से चले गए। चकिया के अंचलाधिकारी, मनरेगा के पीओ और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की कथित गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तिरंगा यात्रा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी अपेक्षित थी। लेकिन अधिकारियों की कथित सीमित भागीदारी ने कार्यक्रम के दौरान ही चर्चा का माहौल बना दिया।

पिपरा विधायक श्यामबाबू यादव ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल तस्वीर खिंचवाने के लिए पहुंचे और इसके बाद यात्रा में उनकी सक्रिय भागीदारी नजर नहीं आई। विधायक ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर वे वरीय अधिकारियों से शिकायत करेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाना चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तिरंगा यात्रा में आम लोग और स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए, तो प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी इतनी सीमित क्यों रही? क्या अधिकारियों को कार्यक्रम के महत्व की जानकारी नहीं थी या फिर इसे महज औपचारिकता समझकर खानापूर्ति की गई?
 


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