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उत्तर प्रदेश: बरेली में किसान के ₹10.42 लाख के चेक बाउंस, जमीन बेचने के बाद न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित

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उत्तर प्रदेश  Published by: Mohd Yaseen , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 13/08/2026 04:16:43 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 13/08/2026 04:16:43 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: दस लाख 42 हजार के चेक हुए बाउंस  किसान के साथ की धोखाधड़ी न्याय के  लिए दरबदर चक्कर काट रहा पीड़ित किसान शीशगढ़/बरेली / पीड़ित (1) मोर सिंह (2) जयप्रकाश (3) अमर सिंह पुत्र पुत्र नत्थू लाल ग्राम बल्ली था

विस्तार

उत्तर प्रदेश: दस लाख 42 हजार के चेक हुए बाउंस  किसान के साथ की धोखाधड़ी न्याय के  लिए दरबदर चक्कर काट रहा पीड़ित किसान शीशगढ़/बरेली / पीड़ित (1) मोर सिंह (2) जयप्रकाश (3) अमर सिंह पुत्र पुत्र नत्थू लाल ग्राम बल्ली थाना शीशगढ़ जनपद बरेली के निवासी है नवंबर 2025 को 6 बीघा जमीन खेती कि 31 लाख 60 हजार रुपए में हर स्वरूप पुत्र श्री रामप्रसाद निवासी ग्राम मुंडिया अहमद नगर थाना इज्जत नगर जिला बरेली को बेची थी पीड़ित किसान मोर सिंह को पैसा चेक के द्वारा दिया जाना तय हुआ जमीन खरीदने वाले हर स्वरूप ने जो चेक दिए थे उनमें दो बैंक चैक बाउंस हो गए लगभग 10 लाख 42 हजार के बाकी चेक कैश हो गए थे पीड़ित किसान मोर सिंह ने चेक बाउंस की सूचना जमीन खरीदने वाले हर स्वरूप पुत्र रामप्रसाद निवासी ग्राम मुंडिया अहमदनगर जिला बरेली को दी तो उसने पीड़ित किसान मोर सिंह को बातों में फंसा कर पैसा देने का वादा कर दिया। 

किसान मोर सिंह पुत्र नत्थू लाल ग्राम बल्ली थाना शीशगढ़ जनपद बरेली उत्तर प्रदेश की जमीन का हर स्वरूप बैनामा दाखिल खारिज भी करा लिया दाखिल खारिज होने के बाद पीड़ित किसान मोर सिंह ने अपना पैसा मांगा तो उसको झूठा आश्वासन ही मिला पीड़ित किसान मोर सिंह शेरगढ़ थाने से लेकर उच्च अधिकारियों के चक्कर काट रहा है मगर इंसाफ किसान को नहीं मिल रहा है।  पुलिस चेक बाउंस के मामले में सीधे एफआईआर  दर्ज नहीं कर सकती। चेक बाउंस होना परक्राम्य लिखत अधिनियम (नेगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट्स एक्ट) की धारा 138 के तहत एक 'नॉन-कॉग्निजेबल' (संज्ञेय-भित्र) अपराध है। इसके लिए पुलिस थाने में शिकायत दर्ज नहीं होती, बल्कि सीधे मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद (क्रिमिनल कंप्लेंट) दायर करना होता है।चेक बाउंस (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138) के मामलों में सुप्रीम कोर्ट और बैंकिंग प्रणाली के ताजा नियमों के अनुसार, एक ही लेनदेन के तहत दिए गए विभिन्न चेक बाउंस होने पर हर चेक के लिए अलग मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके अलावा, तेज डिजिटल समन प्रक्रिया और फास्ट चेक क्लियरिंग सिस्टम को लागू किया गया है।


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