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मध्य प्रदेश: बांदकपुर धाम में महाशिवरात्रि पर उमड़ेगी आस्था की महाधारा, 4 लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान

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मध्य प्रदेश  Published by: Jugal Kishor Pathak , Date: 11/02/2026 05:04:34 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बांदकपुर धाम का श्री जागेश्वर नाथ मंदिर अति प्राचीन एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) शिवलिंग  है, जिसे बुंदेलखंड में 13वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बांदकपुर धाम का श्री जागेश्वर नाथ मंदिर अति प्राचीन एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) शिवलिंग  है, जिसे बुंदेलखंड में 13वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मान्यता के अनुसार, यह स्थान अनादिकाल से है, लेकिन वर्तमान मंदिर का निर्माण 1711 ईस्वी में बालाजी राव चंदोरकर द्वारा करवाया गया था। इसे जागृत धाम माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए रेल मार्ग एवं सड़क मार्ग उपलब्ध है बांदकपुर मंदिर का इतिहास और मुख्य तथ्य: प्राचीनता: मान्यता है कि रामायण काल में रघुवंश के मंत्री रामदेव जी ने विंध्याचल की उत्तरी नदियों की खोज के दौरान यहाँ एक शिवलिंग की स्थापना की थी, जो "वामोदक" (शिव का जल) के रूप में जाना जाने लगा और समय के साथ बांदकपुर हो गया।
स्वयंभू शिवलिंग: यह मंदिर एक जागृत स्थान के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ शिवलिंग अनादिकाल से विराजमान माना जाता है।


18वीं शताब्दी में पुनरुद्धार: इस प्राचीन स्थान को वर्तमान स्वरूप में 1711 ईस्वी में पुन: जागृत किया गया था। माता पार्वती मंदिर: मुख्य मंदिर से कुछ दूरी पर माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित है, जिसे 1844 ईस्वी में स्थापित महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी को बांदकपुर धाम एक बार फिर आस्था, भक्ति और उत्सव का विराट केंद्र बनने जा रहा है। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम, श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन पूरा धाम हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठता है। महाशिवरात्रि की संध्या होते ही दमोह सहित आसपास के अनेक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों समूचे बुंदेलखंड महाकौशल से लाखों शिवभक्त पूरे दिन एवं संध्या के समय अद्भुत  शिव बारातें उत्साह और उमंग के साथ बांदकपुर धाम की ओर प्रस्थान करती हैं। सिर पर कांवड़, हाथों में ध्वज-पताका और मुख पर भोलेनाथ का नाम लिए शिवभक्तों का यह जनसैलाब अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है , बारातों में भोलेनाथ के गण नंदी,श्रृंगी,भृंगी,का रूप धारण किए ,भोलेनाथ का स्वरूप धारण किए गले में नाग मुंडमाला पहने भस्म रमाए अदभुत रूप देखने को मिलता है रात्रि के समय पारंपरिक वेद मंत्रों के साथ शिव विवाह सम्पन्न होता है। 


इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण , पुराना थाना,श्री जटाशंकर धाम से निकलने वाली शिव बारात रहती है भगवान भोलेनाथ की अलौकिक और भक्तिभाव से परिपूर्ण बारात बांदकपुर धाम पहुंचेगी। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और शिव तांडव की झलक के साथ निकलने वाली यह बारात श्रद्धालुओं को भावविभोर कर देती है ताजे फूलों से मंदिर की सजावट आकर्षक मनोहारी लगती है रात्रि के समय आकर्षक लाइटिंग मन को आनंदित करती है बांदकपुर धाम में महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत संगम है। यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है और पीढ़ियों से चली आ रही शिवभक्ति की परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करता है। भव्य कारीडोर निर्माण कार्य आरंभ - प्रदेश सरकार के द्वारा इस धाम के भव्य बनाने 100 करोड़ की लगात से  भव्य कारीडोर निर्माण कार्य आरंभ हो चुका है भक्तों की मांग -  शिवभक्तों श्रद्धालुओं ने शिवरात्रि पर के अवसर पर बांदकपुर धाम मंदिर के मुख्य द्वार को अतिक्रमण मुक्त कर कॉरिडोर निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने की मांग भी दोहराई है, जिससे देश-प्रदेश से आने वाले शिवभक्तों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।


आग्रह -जागेश्वरनाथ भक्त मंडल ने सभी श्रद्धालुओं से महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होकर भगवान जागेश्वरनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की निवेदन आग्रह किया यात्रा में अपने साथ आ रहे बुजुर्ग बच्चों का  विशेष ध्यान रखें  बांदकपुर के आसपास के दर्शनीय स्थल - श्रद्धालु भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शनों उपरांत धाम के दर्शनीय स्थल ,प्राचीन बावड़ी,मंदिर गौशाला,गोवर्धन पर्वत ,केवलारी वाले दादा जी,दादा नित्यानंद सरकार समाधि स्थल,श्री जागेश्वर नाथ जी की ससुराल रोहनिया धाम के आप दर्शन कर सकते है 

परंपरा - मान्यता - चमत्कार मंदिर के पीछे हल्दी के हाथे लागने की प्राचीन परंपरा है हत्थे लगाने से मनोकामना पूर्ण होती है  पैदल यात्रा कर कांवड़ में मां नर्मदा का जल लाकर भोलेनाथ की अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न होते है भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग तिल तिल कर प्रतिवर्ष बढ़ रहा है शिवरात्रि पर्व पर जल ,पुष्प, दूध,दही, घी,बेलपत्र,धुतुरा,बेल,बेर ,गेहूं की बाल,गन्ने का रस,भस्म,अबीर, गुलाल अर्पित कर महादेव जी को प्रसन्न कर सकते है ऐसी मान्यता है इन सभी को अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते है तैयारी -मंदिर प्रबंधन जिला प्रशासन की ओर से बैठक कर व्यवस्थाओं पर पूरी रूपरेखा तैयार की जा चुकी है श्रद्धालु भक्तों को अच्छे से सुलभता से दर्शन हो इसके पूरे इंतजाम किए जा रहे है  अधिक भीड़ को देखते हुए रेलिंग के माध्यम से भक्त भगवान भोलेनाथ जी को जल अर्पित करेंगे जिला पुलिस अधीक्षक महोदय में बताया इस वर्ष 500 से अधिक जवान सुरक्षा में तैनात रहेगा ,जो श्रद्धालु भक्त दर्शनों को आ रहे है उनसे आग्रह है कीमती गहने आदि पहन कर ना आए 
जिला कलेक्टर महोदय ने मंदिर परिसर मेला मैदान मंदिर के चारों ओर साफ सफाई,प्रकाश व्यवस्था,पेयजल ,सी सी टीबी कैमरे, कंट्रोल रूम,पार्किंग ,मेडिकल टीम, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड,आदि की व्यवस्थाओं की जानकारी बैठक के माध्यम से ली एवं सभी व्यवस्थाओं को मेले के पूर्व दुरुस्त करने के दिशा निर्देश दिए ।
 

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