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मध्य प्रदेश: भगवान महाकाल का हुआ भव्य महाभिषेक, कन्या पूजन और भोज किया आयोजित
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: मुक्तिधाम पोरसा में आज आध्यात्मिक आस्था, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
विस्तार
मध्य प्रदेश: मुक्तिधाम पोरसा में आज आध्यात्मिक आस्था, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्व प्रसिद्ध महालोक गर्भगृह स्थित भगवान भोलेनाथ महाकाल मंदिर में श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का विशेष महाभिषेक संपन्न कराया गया। इस दौरान पूरे मुक्तिधाम परिसर में शिवभक्ति, मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण से अलौकिक अनुभूति हो रही थी। मुक्तिधाम का यह पावन स्थल ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का संगम माना जाता है, जहाँ प्रतिदिन दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन एवं पूजन के लिए पहुंचते हैं। आज आयोजित विशेष अनुष्ठान में विशाल शिवलिंग का औषधियों, पंचद्रव्य एवं पवित्र जल से महाभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रों और रुद्राभिषेक के स्वर वातावरण को शिवमय बना रहे थे। श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन किया। इस पावन अवसर पर मुक्तिधाम के चरण सेवक डॉ. अनिल गुप्ता, महेश पेगोरिया, नरेंद्र राठौर, महेंद्र बाल्मीक एवं श्रीमती शीतल ब्यूटी पार्लर द्वारा विशेष रूप से कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन कराया गया। सर्वप्रथम विधि-विधान के साथ कन्याओं का पूजन कर उन्हें देवी स्वरूप मानकर चरण वंदन किया गया। इसके बाद श्रद्धा एवं सम्मान के साथ कन्याओं को भोजन कराया गया तथा उपहार वितरित किए गए। आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कन्याओं का आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस किया। महाभिषेक का धार्मिक महत्व सनातन धर्म में भगवान शिव के महाभिषेक का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि पंचद्रव्य, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर एवं औषधियों से शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। भगवान महाकाल का अभिषेक व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। विशेष रूप से रुद्राभिषेक एवं महाभिषेक को शिव कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम माना गया है। कन्या भोज का आध्यात्मिक संदेश कन्या पूजन एवं कन्या भोज भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्याओं का सम्मान, सेवा और भोजन कराने से देवी शक्ति प्रसन्न होती हैं तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह आयोजन समाज को सेवा, सम्मान और संस्कार का संदेश भी देता है। आज के इस भव्य आयोजन ने मुक्तिधाम को एक बार फिर श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति के जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भगवान महाकाल से विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि एवं मानवता के मंगल की कामना की।
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