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मध्य प्रदेश: भागवत कथा में गूंजा भक्ति और धर्म का संदेश, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 28/05/2026 01:48:57 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
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  • Date:
  • 28/05/2026 01:48:57 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा मेंअन्याय की वैदी पर धर्म का फल पैदा नहीं होता, भगवान भक्ती के बस में है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा मेंअन्याय की वैदी पर धर्म का फल पैदा नहीं होता, भगवान भक्ती के बस में है। भजन जरूरी है भगवान प्रेम से मिलते हैं पैसों से नहीं, घमंडी व्यक्ति के पास भगवान कभी नहीं आते, प्रेम और भक्ति के बसीभूत होकर भगवान ने शबरी के झूठे बेर तक खाए थे भगवान प्रेम से भक्ति के पास चली आते है। हमको भास्कर भागवत भास्कर कृष्ण ठाकुर जी महाराज, जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। इसी दिव्य संदेश के साथ भागवत भास्कर श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज ने पोरसा क्षेत्र में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

पोरसा के मध्य शहर में नागाजी सरोवर परिसर में आयोजित इस भव्य कथा में आज भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा का आयोजन नागाजी महाराज के भक्तों के द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें पूरे क्षेत्र से भक्तजन पहुंचकर धर्म लाभ ले रहे हैं। कथा में क्या रहा खास। चौथे दिन की कथा में भागवत भास्कर श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज ने अत्यंत भावपूर्ण और विस्तारपूर्ण शैली में कई प्रमुख प्रसंगों का वर्णन किया। समुद्र मंथन और उसमें निकले अमृत की कथा, राजा बली और वामन अवतार का चरित्र। भगवान श्रीराम का जन्म अधर्म के विनाश हेतु अवतार, लंकापति रावण को मारने के लिए अवतार लिया और धरती पर मर्यादा काइम की

भगवान श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य कथा

उनके ओजस्वी प्रवचन से पूरा पंडाल जय श्रीराम और हरे कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। धर्म के साथ दिया सामाजिक संदेश, कथा के अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करते हुए कहा वृक्ष ही जीवन का आधार हैं हरियाली से ऑक्सीजन, और ऑक्सीजन से जीवन संभव है। कथा का मुख्य संदेश भागवत भास्कर श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज ने अपने प्रवचन में स्पष्ट रूप से कहा भगवान की भक्ति जीवन को सरल और सुखमय बनाती है, माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है, समाज में प्रेम, भाईचारा और मानवता बनाए रखना अनिवार्य है। भक्तों का सराहनीय सहयोग। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में भक्तों का विशेष योगदान रहा। पोरसा में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और आपसी सद्भाव का मजबूत संदेश देने का माध्यम बन रही है।

सच्चे संत का मार्गदर्शन और श्रद्धा से कथा श्रवण, जीवन की दिशा बदल सकता है। अपने जीवन के उद्धार के लिए पूर्व में आज से बहुत साल पहले लोग भगवान के नाम पर  अपने बच्चों का नाम रखते थे ,जिससे बच्चे को पुकारते पुकारते  भगवान का जाप हो जाया करता था आज लोग अपने बच्चों के नाम छोटे और अटपटे रखे  जाते  हैं जहां भगवान का कहीं भी नाम नहीं होता, उद्धार कैसे होगा। कथा का क्रम आगे भी जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन नए आध्यात्मिक प्रसंगों के साथ श्रद्धालुओं को धर्म और जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया जाएगा। कथा में मूल पाठ माला हुआ भजन में आचार्य बाबूलाल शास्त्री ,पंडित देवेंद्र उपाध्याय, पंडित ओम नारायण शास्त्री, पंडित शैलेंद्र शास्त्री ,पंडित माधव शास्त्री ,साथ दे रहे हैं ,जबकि हारमोनियम एवं गायन पर नानक चंद शर्मा वह अभय पांडे तथा तबला पर शिवम  तिवारी पेढ पर मनमोहन रावल, बैंजो पर आनंद वरमैया, और लाइव प्रसारण पर कपिल  सिंह सहयोग कर रहे हैं। कथा की पंडाल खचाखच भरी हुई थी, समाजसेवी लोग जल सेवा व सरवत सेवा में संलग्न थे।