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मध्य प्रदेश: अन्नदाता पर प्रकृति की मार सोनकच्छ में ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से रबी फसलें तबाह
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: पिछले दो दिनों से बदले मौसम के मिजाज और तेज आंधी-तूफान ने क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में असमय वर्षा और भीषण आंधी के कारण खेतों में खड़ी सुनहरी गेहूं और अन्य रबी की फसलें पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है, क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने इस विकट परिस्थिति को देखते हुए तुरंत मोर्चा संभाला है उन्होंने प्रभा
विस्तार
मध्य प्रदेश: पिछले दो दिनों से बदले मौसम के मिजाज और तेज आंधी-तूफान ने क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में असमय वर्षा और भीषण आंधी के कारण खेतों में खड़ी सुनहरी गेहूं और अन्य रबी की फसलें पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है, क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने इस विकट परिस्थिति को देखते हुए तुरंत मोर्चा संभाला है उन्होंने प्रभावित गांवों का जायजा लेने के साथ ही जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि किसानों को इस आपदा में अकेला न छोड़ा जाए। कलेक्टर को लिखा पत्र: 'तत्काल शुरू हो सर्वे की प्रक्रिया' विधायक डॉ. सोनकर ने जिलाधीश (कलेक्टर), देवास को पत्र (क्रमांक 3470/26) लिखकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया है। उन्होंने मांग की है कि सोनकच्छ और टोंकखुर्द तहसील के उन सभी गांवों में जहाँ नुकसान हुआ है, वहाँ राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल भेजा जाए डॉ. सोनकर ने स्पष्ट किया है कि दो दिनों में हुई इस अप्रत्याशित प्राकृतिक घटना से कृषक वर्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है गेहूं और रबी की फसलें कटने की कगार पर थीं, लेकिन आंधी और बारिश ने उन्हें भारी क्षति पहुंचाई है शासन स्तर पर नियमानुसार तत्काल सर्वे (गिरदावरी) सुनिश्चित की जाए ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके किसानों के साथ खड़े हैं सोनकर। विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने किसानों को आश्वस्त किया है कि वे पूरी मजबूती के साथ उनके हक की लड़ाई लड़ेंगे उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में वे किसानों के साथ हैं और सुनिश्चित करेंगे कि सर्वे में कोई भी पात्र किसान छूटने न पाए प्रशासन की टीम खेतों में जाकर वास्तविक नुकसान का आकलन करे, ताकि अन्नदाता को उसकी मेहनत का सही मुआवजा मिल सके।