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मध्य प्रदेश: सोलर पंप से बदली किसान जनवेद धाकड़ की तस्वीर, सिंचाई आसान और बढ़ी फसल उत्पादन
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: कभी डीजल की बढ़ती कीमतों और बिजली की अनियमित आपूर्ति से परेशान रहने वाले विकासखंड पहाड़गढ़ के ग्राम कोटसिरथरा के किसान जनवेद धाकड़ आज आत्मविश्वास और संतोष के साथ खेती कर रहे हैं।
विस्तार
मध्य प्रदेश: कभी डीजल की बढ़ती कीमतों और बिजली की अनियमित आपूर्ति से परेशान रहने वाले विकासखंड पहाड़गढ़ के ग्राम कोटसिरथरा के किसान जनवेद धाकड़ आज आत्मविश्वास और संतोष के साथ खेती कर रहे हैं। शासन की सोलर पंप योजना ने न केवल उनकी खेती को नई दिशा दी है, बल्कि उनके जीवन में भी आशा और स्थिरता का नया उजाला भर दिया है। जनवेद धाकड़ के पास खेती योग्य पर्याप्त भूमि है, लेकिन सिंचाई की समस्या लंबे समय से उनके लिए चिंता का कारण बनी हुई थी। कभी डीजल की व्यवस्था करनी पड़ती थी, तो कभी अस्थायी बिजली कनेक्शन के भरोसे खेती करना मजबूरी बन जाता था। कई बार समय पर पानी नहीं मिलने से फसलें प्रभावित होती थीं और मेहनत के अनुरूप उत्पादन नहीं मिल पाता था। खेती की बढ़ती लागत ने आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया था। इसी बीच विभागीय योजना के अंतर्गत उन्हें 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप प्राप्त हुआ। इसके बाद उनकी जिंदगी और खेती दोनों में सकारात्मक बदलाव आने लगे। अब सूरज की रोशनी से संचालित सोलर पंप के माध्यम से उनके खेतों में नियमित और निर्बाध सिंचाई हो रही है। डीजल खर्च पूरी तरह समाप्त हो गया है और बिजली की चिंता से भी राहत मिल गई है। जनवेद धाकड़ बताते हैं कि पहले खेती करना चिंता और संघर्ष से भरा रहता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। समय पर सिंचाई मिलने से उनकी फसलें बेहतर हो रही हैं और उत्पादन में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। खेतों में लहलहाती फसलें देखकर उन्हें अपनी मेहनत सफल होती दिखाई देती है। वे भावुक होकर कहते हैं कि सोलर पंप ने केवल पैसे की बचत नहीं कराई, बल्कि उनके परिवार को मानसिक सुकून भी दिया है। अब घर में बिजली की सुविधा भी बेहतर हुई है और खेती पहले से अधिक लाभकारी बन गई है। जनवेद धाकड़ अन्य किसानों से भी शासन की इस योजना का लाभ लेने की अपील करते हुए कहते हैं कि नई तकनीक और सरकारी योजनाएं किसानों के जीवन को वास्तव में बदल सकती हैं, आवश्यकता केवल जागरूक होकर आगे बढ़ने की है। मुरैना जिले में वर्तमान में 455 किसानों द्वारा सोलर पंप के लिए आवेदन किए गए हैं, जिनमें से मार्च एवं अप्रैल माह में 115 किसानों के यहां सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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