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मध्य प्रदेश: राहुल नवरंग के बसपा छोड़ने की अटकलें तेज, RPI से संपर्क की चर्चा

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मध्य प्रदेश  Published by: Fulchand Malviya , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 02/07/2026 10:18:29 am Share:
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  • Published by.: Fulchand Malviya ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 02/07/2026 10:18:29 am
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: राजनीति में युवा, प्रखर और बेबाक चेहरों को अपने पाले में लाने की होड़ के बीच मालवा अंचल से एक बड़ी राजनैतिक खबर सामने आ रही है सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में सक्रिय भूमिका निभा चुके और वर्तमान में मिशन महाराजा बली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष,

विस्तार

मध्य प्रदेश: राजनीति में युवा, प्रखर और बेबाक चेहरों को अपने पाले में लाने की होड़ के बीच मालवा अंचल से एक बड़ी राजनैतिक खबर सामने आ रही है सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में सक्रिय भूमिका निभा चुके और वर्तमान में मिशन महाराजा बली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष, धारदार युवा पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता राहुल नवरंग को अपने पाले में करने के लिए राजनीतिक दल लगातार डोरे डाल रहे हैं इस बीच खबर है कि करीब डेढ़ साल पहले पार्टी के भीतर हुए एक बड़े अंदरूनी विवाद के बाद से ही राहुल नवरंग की बसपा से दूरी बनी हुई है बताया जा रहा है कि उस विवाद के बाद भी बहुजन समाज पार्टी के कुछ गुट और नेताओं द्वारा लगातार उनकी बेइज्जती और उपेक्षा की जाती रही, जिससे आहत होकर उन्होंने पार्टी संगठन से पूरी तरह किनारा कर लिया और यह दूरी लगातार बनी रही।  हालांकि, अब उनकी बढ़ती ताकत और जमीनी पकड़ को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय नेता और वरिष्ठ कार्यकर्ता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं पार्टी पदाधिकारी लगातार उनसे संपर्क साधकर पुराने विवाद, कड़वाहट और इस दूरी को खत्म करने तथा दोबारा घर लौटने की गुहार लगा रहे हैं। 

 लेकिन लगातार हुई बेइज्जती के चलते राहुल नवरंग की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब न मिलने और उनकी लंबी चुप्पी ने बसपा खेमे की बेचैनी को चरम पर पहुंचा दिया है
राजनैतिक समीक्षकों का मानना है कि बसपा में हुए संगठन के भीतर के विवाद, लगातार हुई उपेक्षा और अब कार्यकर्ताओं की इस मान-मनौव्वल के बाद भी राहुल नवरंग दोबारा वापसी के मूड में बिल्कुल नजर नहीं आ रहे हैं अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राहुल नवरंग इस समय रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के वरिष्ठ नेतृत्व के सतत संपर्क में बने हुए हैं कयास लगाए जा रहे हैं कि वे इस प्रमुख दल के साथ मिलकर क्षेत्र में एक नया और मजबूत राजनीतिक विकल्प खड़ा कर सकते हैं इसके पीछे सबसे मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि एक स्वतंत्र युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष सामाजिक संगठन के मुखिया होने के नाते नवरंग जमीनी स्तर पर बिना किसी केंद्रीय दबाव के स्वतंत्र फैसले लेने की कार्यशैली पसंद करते हैं, जो बसपा के कड़े केंद्रीय अनुशासन और विवादित सांगठनिक माहौल में मिलना मुश्किल है वहीं दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया भी उसी शोषित, वंचित व मूलनिवासी समाज के हक की लड़ाई लड़ रही है इस दल से वैचारिक समानता होने के कारण राहुल नवरंग को यहाँ युवा नेतृत्व को अपनी बात रखने, स्वतंत्र नीति बनाने और सांगठनिक सम्मान मिलने की गुंजाइश कहीं अधिक नजर आती है, जहाँ सम्मान के साथ काम किया जा सके। 

फिलहाल, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के स्थानीय और प्रांतीय पदाधिकारी इस उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं कि राहुल नवरंग का साथ मिलने से जमीनी स्तर पर युवाओं और 'मिशन महाराजा बली सेना' के कार्यकर्ताओं का एक बड़ा और मजबूत जनाधार उनके पाले में आ जाएगा दूसरी तरफ बसपा कार्यकर्ता पुराने विवाद और मतभेदों को भुलाकर अब उन्हें रीझाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं, हालांकि, इन तमाम चर्चाओं और संपर्क के बीच राहुल नवरंग ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि उनकी यह चुप्पी किसी बड़ी और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है वे जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने के बजाय अपने समर्थकों, संगठन के पदाधिकारियों और क्षेत्र की जनता के हितों को सर्वोपरि रखकर ही कोई अंतिम फैसला लेंगे अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में यह युवा चेहरा किस करवट बैठता है। 


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