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ओडिशा: पुरी में ओड़िया भाषा शास्त्रीय मान्यता सप्ताह पर साहित्यिक गोष्ठी और कवि सम्मेलन

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ओडिशा  Published by: Laxminarayan Pathi , Date: 16/03/2026 02:07:59 pm Share:
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  • 16/03/2026 02:07:59 pm
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संक्षेप

ओडिशा: पुरी जिला डेलांग ष्टेसन बाजार अंतर्गत श्यामसुंदर पुस्तकालय की सम्मेलन कक्षा में ओडिआ भाषा शास्त्रीय मान्यता सप्ताह 15 मार्च को आयोजित हुआ । सेवानिवृत्त शिक्षक काशीनाथ महापात्र के तत्वावधान में श्यामसुंदर पुस्तकालय परिसर पर शास्त्रीय मान्यता प्राप्ति

विस्तार

ओडिशा: पुरी जिला डेलांग ष्टेसन बाजार अंतर्गत श्यामसुंदर पुस्तकालय की सम्मेलन कक्षा में ओडिआ भाषा शास्त्रीय मान्यता सप्ताह 15 मार्च को आयोजित हुआ । सेवानिवृत्त शिक्षक काशीनाथ महापात्र के तत्वावधान में श्यामसुंदर पुस्तकालय परिसर पर शास्त्रीय मान्यता प्राप्ति की तेरहवीं वर्षगांठ पर ओडिआ साहित्य की आलोचनात्मक वैठक और कविता पाठोत्सव अनुष्ठित हुआ । मुख्य अतिथी सम्मिलित पुरी निमापडा केंद्र समवाय वैंक अध्यक्ष किशोर कुमार छोटराय प्रदीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की । मुख्य वक्ता प्रधान शिक्षक  प्रभात कुमार सेठी और सम्मानित अतिथी   विधिवक्ता हृषीकेश पाढी मंचासीन रहे । सेवानिवृत्त प्रधान शिक्षक दिगम्बर रथ इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की । 

कार्यक्रम की उद्देश्य वताते हुए काशीनाथ महापात्र ने कहा कि आजकल गांव में ही सिर्फ लौकिक ओडिआ भाषा कहा जाता है । सहर की वावुलोग खुद को ओडिआ वोलने में शायद ही झिझकते हैं । इसकी वजह यह है कि दुसरों के साथ वातचित करते हुए उनके मुंह से ना के वरावर ओडिआ ज्यादा ही अन्य भाषा टपकता ही रहता है । मातृभाषा ओडिआ के प्रति यह सरासर अन्याय है । इसका प्रतिकार हेतु सव ओडिआ कहे और ओडिआ होने के लिए खुद को गर्व करे । मुख्य अतिथी किशोर कुमार छोटराय ने अपनी संवोधन में कहा कि यह एक गर्व की वात है कि हम सव ओडिआ हैं ।शास्त्रीय मान्यताप्राप्त ओडिआ भाषा हमारे लिए वहुत वडा उपलब्धि है । इसकी वचाव में सवके दिल में मातृभाषा के प्रति प्यार व लगाव रखने को उन्होने आग्रह किया । 

सभाध्यक्ष दिगंबर रथ ने अपनी संवोधन में ओडिआ भाषा को सवसे प्यारा व श्रेष्ठ वताया । साथ ही खुद का एक कविता और राज्य की जातीय संगीत मान्यताप्राप्त वंदे उत्कल जननी पाठ की । उस दौरान मातृभूमि के  प्रति अपनी कर्तव्य और प्रेम भावना को दर्शाते हुए सवने खडे रहे । कविता पाठोत्सव में भाग लेकर हृषीकेश पाढी,रोहित चंपति,पार्वती प्रधान,स्वर्णप्रभा नंद,सरोज कुमार प्रधान, चंद्रशेखर सेठी और प्रशांत कुमार प्रधान ने अपनी अपनी कविता पाठ किए । अन्य वुद्धिजीवीयों में अनाम मल्लिक,सुरेश कुमार मंत्री,हरिहर वलवंतराय,क्षेत्रवासी आलुक और विजय कुमार प्रधान ने ओडिआ भाषा की शास्त्रीय मान्यता को लेकर अपनी अपनी राय प्रकट किए ।  कार्यक्रम की संचालन कवयित्री ज्योस्नामयी स्वाइँ ने की । इस अवसर पर काशीनाथ महापात्र के द्वारा चाय नास्ता का आयोजन हुआ था जिसका आंनद सवने उठाए ।