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राजस्थान: 150वां निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर लगे, वासुदेव देवनानी ने किया शुभारंभ

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राजस्थान  Published by: Manoj Kumar Chordiya , राजस्थान  Edited By: Kunal, Date: 18/04/2026 10:59:03 am Share:
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  • Published by.: Manoj Kumar Chordiya ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 18/04/2026 10:59:03 am
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संक्षेप

राजस्थान: जयपुर राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने अशोका फाउण्डेशन द्वारा यहां श्री नृसिंह मंदिर में आयोजित 150 वें निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया।

विस्तार

राजस्थान: जयपुर राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने अशोका फाउण्डेशन द्वारा यहां श्री नृसिंह मंदिर में आयोजित 150 वें निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। स्पीकर श्री देवनानी ने कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नेत्र चिकित्सा शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद एवं निर्धन वर्ग के लोगों को निःशुल्क जांच, परामर्श एवं उपचार की सुविधा मिलती है, जो एक सराहनीय पहल है। श्री देवनानी ने कहा कि नेत्र चिकित्सा सेवा आध्यात्मिक साधना है। श्री देवनानी ने श्री नृसिंह मंदिर में दर्शन और पूजा कर प्रदेश की खुशहाली एवं समृ‌द्धि की कामना की। विधान सभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि समाज में सच्चा और स्थायी परिवर्तन सरकारी नीतियों या योजनाओं से अकेले नहीं आता है बल्कि यह ऐसे निस्वार्थ सेवा-भाव, समर्पण और हर व्यक्ति के भीतर अपने कर्तव्य व मानवता के प्रति जागरूकता का संचार करने के सामूहिक प्रयासों से आता है। जब समाज जागरुक होकर, आगे बढ़कर सेवा का कार्य करता है, तब ही राष्ट्र सशक्त, समृद्ध और संस्कारवान बनता है।

श्री देवनानी ने कहा है कि यह 150 वॉ शिविर केवल एक उपलब्धि का उत्सव नहीं है, बल्कि सेवा यात्रा का महत्वपूर्ण पडाव है। यह हमें प्रेरित करता है कि सेवा का यह पावन दीपक कभी बुझने न पाए। इसे और अधिक प्रज्ज्वलित करना है साथ ही अधिक से अधिक लोगों की मदद करनी है। विधान सभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा है कि यदि हम गहराई से देखें तो यह नेत्र चिकित्सा सेवा केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना है। जब किसी की आँखों में प्रकाश लौटता है, तो वह व्यक्ति केवल बाहरी दुनिया को नहीं देखता वह अपने भीतर के अस्तित्व को, अपने जीवन के सार्थक आयामों को और ईश्वर की अनंत कृपा को भी नए सिरे से अनुभव करता है। सेवा और साधना यहाँ एकाकार हो जाते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए श्री देवनानी ने उनके प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।